क्वारंटाइन सवर्णों ने कहा- भोजन बनाने वाली महिला दलित है, हम उसके हाथ का खाना नहीं खाएंगे!

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Ground Report News Desk | New Delhi

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक के एक गांव में जातिवाद का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। अजबीगरीब इसलिए क्योंकि कोरोना से जूझ रहे दौर में जहां दलित सफाई कर्मियों का हौसला बढ़ाने के लिए उन पर फूल बरसाए जा रहे हैं वहीं क्वारंटाइन किए गए दो लड़को ने दलित के हाथ से बना खाना खाने से इनकार कर दिया।

न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक, क्‍वारंटाइन किए गए इन दो सवर्ण लड़कों ने गांव की ही रहने वाली दलित भोजनमाता के हाथ से बना खाना खाने से इनकार कर दिया। मामला नैनिताल के ओखलकांडा ब्लॉक के भुमका गांव का है। ये मामला जब ग्राम प्रधान तक पहुंचा तो ग्राम प्रधान ने पहले सवर्ण युवकों को समझाने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो पटवारी चौकी में शिकायत दर्ज करवाई गई।

हिन्दी न्यूज वेबसाइट न्यूज 18 इंडिया की खबर के अनुसार, हिमाचल प्रदेश और हल्द्वानी से आए चाचा-भतीजे को स्कूल में बने क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया है। सेंटर में खाना-पीना बनाने की जिम्मेदारी स्कूल में भोजनमाता का काम करने वाली एक दलित महिला को दी गई है। लेकिन स्कूल में क्वारंटाइन किए गए दो युवक इस महिला के हाथ से बना हुआ भोजन और दिया हुआ खाना खाने से इनकार कर रहे हैं। यही वजह है कि इन दोनों के लिए अब घर से बना खाना मंगाया जा रहा है।

इस मामले में गांव के प्रधान मुकेश चंद्र बौद्ध ने नाई पट्टी के पटवारी को शिकायत करते हुए बताया कि यहां उनके गांव में बाहर से आए 5 प्रवासियों को क्वारंटाइन किया गया है जिनमें तीन दलित और दो सवर्ण शामिल हैं, लेकिन सवर्णों ने क्वारंटाइन सेंटर में मिल रहा भोजन करने से इनकार कर दिया है। दोनों सवर्ण युवकों का कहना है कि भोजन बनाने वाली महिला दलित है इसलिए वह उसके हाथ का भोजन नहीं कर सकते। इसलिए उन्हें घर का भोजन दिया जाए।

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इस पूरे वाकये के बाद गांव के प्रधान ने दोनों सवर्णों के खिलाफ एससी एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। पटवारी ने ग्राम प्रधान पर कार्रवाई का भरोसा दिया है।

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