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राजा भैया को बचाकर फंसी योगी सरकार, मुकदमा हटाने के लिए पास कराया था विधेयक

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अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस का दावा करने वाली उत्तर प्रदेश की योगी सरकार कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेकर फंसती हुई दिख रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार से राजा भैया के खिलाफ दर्ज केस वापस लिए जाने का कारण पूछा है। हाईकोर्ट ने कहा कि संतोषजनक कारण नहीं मिलने पर वह मामले का परीक्षण करेगी।

Priyanshu | Lucknow

पीठ के सम्मुख पेश हुए याचिकाकर्ता शिव प्रकाश मिश्र सेनानी के वकील एसएन सिंह रैक्वार ने कहा कि उनका मुवक्किल राजा भैया के खिलाफ विधानसभा चुनाव में खड़ा हो चुका है। उसे जान का खतरा है। याची को दी गई सुरक्षा की अवधि खत्म होने वाली थी। उसने इसे जारी रखे जाने के लिए प्रत्यावेदन भी दिया था जिस पर निर्णय नहीं लिया गया। अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल की सुरक्षा बनाए रखने और राजा भैया के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लिए जाने का मुद्दा भी उठाया। इस पर अदालत ने कहा कि यदि आरोपी रघुराज प्रताप सिंह के खिलाफ दर्ज मुकदमे सरकार के इशारे पर वापस लिए गए हैं तो सरकारी अधिवक्ता अधिकारियों से इसका भी कारण स्पष्ट करके बताएं।

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योगी सरकार अपने नेताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में दर्ज करीब 20 हजार केस हटाने के लिए विधेयक तक पास करा चुकी है। 21 दिसंबर, 2017 को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह विधेयक पास हुआ था। इसमें पहले 2013 तक दर्ज हुए मामले शामिल किए गए थे मगर बाद में इसकी अवधि 31 दिसंबर 2015 तक कर दी गई। अगले दिन इंवेस्टर्स मीटिंग के लिए मुंबई पहुंचे सीएम योगी ने कहा था, ‘ये 20 हजार मुकदमे वे हैं जो अनावश्यक हैं। वर्षों से लंबित पड़े हुए हैं…सामान्य हैं..।’

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धड़ल्ले से हटाए जा रहे केस
यूपी सरकार अलीगढ़ के दो भाजपा विधायकों समेत अपने 11 नेताओं के खिलाफ 13 साल पहले दर्ज मुकदमे भी वापस लेने की तैयारी में जुटी है। साल 2007 में बिना इजाजत धरना देने, 144 का उल्लंघन और हेट स्पीच के आरोप में 17 भाजपा नेताओं को नामजद किया गया। इनमें से 11 नेताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी। अभियोजक को भाजपा विधायक अनिल पाराशर समेत अन्य पर दर्ज केस वापस लेने के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र लगाने के लिए लिखित अनुमति दे दी गई है। राज्यपाल से भी मंजूरी मिल चुकी है।

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खुद को भी दे चुके हैं ‘क्लीनचिट’
एनडीटीवी की खबर के अनुसार, दो साल पहले योगी सरकार ने अपने मुखिया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ 22 साल पुराना मुकदमा वापस ले लिया था। यह मुकदमा 27 मई, 1995 को गोरखपुर के पीपीगंज थाने में मौजूदा सीएम योगी आदित्यनाथ, मौजूदा केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिवप्रताप शुक्ल समेत 13 लोगों पर धारा 188 के तहत दर्ज हुआ था। इनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी हुआ था।

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