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मजदूरों से 12-12 घंटे ‘गधा-हंबाली’ करवाने के मुद्दे पर योगी सरकार ‘चारों खाने चित’, वापस लेना पड़ा फैसला!

Yogi Adityanath used Kolkata's development pictures for UP advertisement
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Ground Report News Desk | New Delhi

देश भर में श्रमिकों और मजदूरों और कामगारों के काम के घंटों को 8 से बढ़ाकर 12 घंटे तक करने की चर्चा जोरो पर हैं। सरकार इसके लिए नए कानून और विधेयकों में बदलाव भी करने की तैयारी कर रही है जिसका भारी विरोध और आलोचना जारी है। ऐसी ही भारी विरोध के साथ उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार चारो खाने चित हो गई।

दरअसल, योगी सरकार चाहती थी कि कोरोना काल में लॉकडाउन के चलते जो आर्थिक नुकसान हो रहा है उससे मिनिमम वेतन या उतने ही वेतन में श्रमिक 8 घंटे की जगह 12-12 घंटे तक गधा हंबाली करते रहें। सरकार ने बकायदा इसके लिए अधिसूचना तक जारी कर दी लेकिन चौतरफा आलोचना होने के बाद प्रशासन ने इस संबंध में जारी अधिसूचना को हफ्ते भर बाद ही निरस्त कर दिया है।

न्यूज वेबसाइट न्यूज क्लिक की खबर के मुताबिक, संशोधन की अधिसूचना को खत्म किए जाने की जानकारी प्रमुख सचिव (श्रम) सुरेश चंद्रा ने शुक्रवार को पत्र के जरिए इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य स्थायी अधिवक्ता को दी है। पत्र में जानकारी दी गई है कि 8 मई को इस संबंध में जारी अधिसूचना को शुक्रवार (15 मई 20) को निरस्त कर दिया गया है।

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क्या है पूरा मामला?

दरअसल उत्तर प्रदेश श्रम विभाग की ओर से बीती 8 मई को एक अधिसूचना जारी की गई थी। इस अधिसूचना के मुताबिक, रजिस्टर्ड कारखानों में युवा श्रमिकों के काम करने की अवधि एक कामकाजी दिन में आठ घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे यानी एक हफ्ते में 72 घंटे किए जाने का फैसला लिया गया था।

वहीं अगर श्रम नियमों की बात करें तो एक दिन में किसी भी श्रमिक से अधिकतम आठ घंटे और एक हफ्ते में 48 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकता। अगर कोई नियोक्ता ऐसा करता है तो मज़दूरी की दोगुनी दर से प्रत्येक घंटे के लिए ओवरटाइम देना अनिवार्य होता है।

इस मामले में न्यूज क्लिक की पत्रकार सोनिया यादव लिखती हैं, नई अधिसूचना के खिलाफ वर्कर्स फ्रंट की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई थी। इसके बाद गुरुवार, 14 मई को मुख्य न्यायधीश की खंडपीठ ने सरकार को नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई का के लिए 18 मई का ऐलान किया। लेकिन खास बात यह है कि इस सुनवाई से पहले ही सरकार अपने फैसले से पीछे हट गई है। सरकार द्वारा जारी इस अधिसूचना को वापस लिए जाने के बाद प्रदेश में एक बार फिर श्रमिकों से काम कराने की अवधि अधिकतम आठ घंटे हो गई है।

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गौरतलब है कि श्रम कानूनों में ढ़ील देने को लेकर योगी सरकार विपक्ष के निशाने पर है। राज्य के तमाम मज़दूर संगठनों ने भी योगी सरकार के इस फरमान के खिलाफ भारी विरोध जताते हुए हल्ला बोल दिया है। गुरूवार, 14 मई को सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) ने प्रदेश के तमाम जिला कार्यालयों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सरकार के फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया। वहीं बुधवार, 20 मई को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़े संगठन भारतीय मज़दूर संघ ने राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी दी है।