US President Election: कैसे होता है अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव?

US President Election 2020: पूरी दुनिया इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव US President Election पर आंखे गड़ाए बैठी है। अमेरिका में कौन राष्ट्रपति होगा इसका असर केवल अमेरिका ही नहीं पूरी दुनिया पर होता है। इस बार के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से जो बाइडेन चुनावी मैदान में है। अमेरिका में दो ही पार्टी होती हैं इसलिए मुकाबला भी दो ही उम्मीदवारों के बीच है। अमेरिका में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद 3 नवंबर को चुनावी नतीजे घोषित हो जाएंगे।

क्या है रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी में अंतर?

रिपब्लिकन पार्टी

अमेरिका में दो पार्टी सिस्टम है इसलिए अंत में दोनो में से एक पार्टी का ही उम्मीदवार राष्ट्रपति बनता है। रिपब्लिकन पार्टी की ओर से डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के लिए मैदान में है। रिपब्लिकन पार्टी वैचारिक तौर पर रुढ़ीवादी मानी जाती है। इसे जीओपी यानी ग्रैंड ओल्ड पार्टी के नाम से भी जाना जाता है। रिपब्लिकन पार्टी कम से कम टैक्स, बंदूक के अधिकार और प्रवासियों को लेकर सख्त कानून की पक्षधर रही है। अमेरिका के ग्रामीण इलाकों में रिपब्लिक पार्टी का अच्छा खासा जनाधार है। पिछले कुछ राष्ट्रपति जैसे जॉर्ज बुश, रोनाल्ड रीगन और रिचर्ड निक्सन भी रिपब्लिकन पार्टी से ही जीतकर राष्ट्रपति बने थे।

डेमोक्रेटिक पार्टी

डेमोक्रेट्स उदारवादी विचारधारा के माने जाते हैं। इस बार (US President Election) चुनाव में जो बाईडेन डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी का जनाधार शहरी क्षेत्रों में ज्यादा है। अमेरिका को ओबामा के रुप में देश का पहला अश्वेत राष्ट्रपति डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से ही मिला था। बराक ओबामा ने 8 साल अमेरिका पर शासन किया था।

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कैसे तय होता है विजेता?

अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव (US President Election) सीधा नहीं होता। 18 साल से अधिक उम्र के लोग अपने राज्य का प्रतिनिधी चुनते हैं। हर राज्य के निर्धारित वोट होते हैं, जो वहां की जनसंख्या के आधार पर होते हैं। अमेरिका में अभी कुल 538 वोट हैं यानी अमेरिका राष्ट्रपति बनने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 270 वोट जीतने होते हैं। इसे इलेक्टोरल कॉलेज कहते हैं। दोनो ही पार्टी के उम्मीदवार इलेक्टोरल कॉलेज के अधिक से अधिक वोट पाने की कोशिश करते हैं।

वोटर अपने राज्य के उम्मीदवारों को वोट करते हैं इसलिए कई बार किसी उम्मीदवार को वोट अधिक मिलते हैं लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज के अधिक वोट न जुटाने के चलते वह राष्ट्रपति नहीं बन पाता। पिछले चुनावों में हिलेरी क्लिंटन को देशभर में ट्रंप से ज्यादा वोट हासिल हुए थे लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज ट्रंप के पास अधिक था।

अमेरिका में कुल 50 राज्य हैं। इन राज्यों की जनसंख्या के आधार पर यहां इलेक्टोरल वोट निर्धारित है। माना जाता है किसी राज्य के इलेक्टोरल वोट पाने के लिए उम्मीदवार को उस राज्य में अधिक से अधिक वोट जुटाने होते हैं। यानी जिस राज्य में वोट अधिक मिलेंगे वहां से इलेक्टोरल वोट भी अधिक मिल जाएंगे। इसीलिए अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव में अलग अलग राज्यों में चुनावी डिबेट आयोजित की जाती हैं जहां उम्मीदवार अपनी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के रैलिया करता है। कहते हैं कि राज्यों का अलग-अलग पार्टी के तरफ झुकाव होता है। ऐसे में उम्मीदवार को जीत के लिए बड़ी मश्क्कत करनी होती है। भारत की ही तरह बड़े राज्य जहां इलेक्टोरल वोट अधिक हैं चुनवा का रुख तय करते हैं। जैसे कैलिफोर्निया और टेक्सस राज्य में सबसे अधिक वोट हैं जैसे भारत में बिहार और यूपी। इन राज्यों में जीतने वाले उम्मीदवार की जंग आसान हो जाती है।

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(US President Election) मतदान कैसे होता है?

अगर आप अमेरिका के नागरिक हैं और 18 साल या उससे अधिक आपकी उम्र है तो आप हर चार साल में होने वाले मतदान में हिस्सा ले सकते हैं। हालांकि कई राज्यों में पहचान के लिए कड़े कानून है जहां आपको वोट देने से पहले अपना पहचान पत्र दिखाना होता है।

रिपब्लिक पार्टी के लोग मानते हैं कि फर्जी मतदान से बचने के लिए यह ज़रुरी है तो डोमोक्रेट इसे वोटर के अधिकार हनन के रुप में देखता है क्योंकि कड़े कानून की वजह से गरीब और अल्पसंख्यक अपना पहचान पत्र नहीं दिखा पाते, जैसे ड्राईविंग लाइसेंस की अनिवार्यता।

कोरोना महामारी के बीच होने वाला यह अमेरिका का पहला चुनाव है। वोटर की सुरक्षा के लिए बड़ी मात्रा में पोस्टल बैलट से मतदान हो रहे हैं जिसे कई नेता ज़रुरी मानते हैं। लेकिन रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप इसे अभी से वोटर फ्रॉड करार दे रहे हैं। अगर चुनाव बाद ट्रंप पोस्टल बैलट के रिज़ल्ट को मानने से इंकार कर देंगे तो अमेरिका में बड़ा संवैधानिक संकट पैदा हो जाएगा।

क्या यह चुनाव सिर्फ राष्ट्रपति चुनने के लिए है?

नहीं यह चुनाव सिर्फ राष्ट्रपति चुनने के लिए नहीं होता, लोग इस चुनाव में अपने सांसद या कांग्रेस मेन भी चुनते हैं। यह राज्य के प्रतिनिधी होते हैं जो अलग-अलग मुद्दों पर संसद में कानून पारित करवाने का काम करते हैं। साथ ही अपने क्षेत्र के विकास के लिए उत्तरदायी होते हैं। अमेरिका में विधायिका दो भागों में विभाजित है, पहला हाउस ऑफ रिप्रेसेंटेटिव कहलाता है तो दूसरा सीनेट। सीनेट के सदस्य सीनेटर कहलाते हैं तो हाउस के सदस्य रिप्रेसेंटेटिव। दोनो का चुनाव जनता सीधे वोट देकर करती है। अमेरिकी विधायिका यानि कांग्रेस में 100 सीनेट के पद होते हैं तो 435 रिप्रेसेंटेटिव के कुल मिलाकर 535 सदस्य।

इस वर्ष हाउस में डेमोक्रेटिक पार्टी के पास बहुमत है। सीनेट की 33 खाली सीटों पर चुनाव होना है। ऐसे में डेमोक्रेटिक पार्टी यहां जीत दर्ज कर अपना दबदबा कायम करना चाहेगी।

कब घोषित होंगे नतीजे?

सभी वोटों की गिनती में कई दिन लग सकते हैं। पर मतगणना के शुरुवाती घंटों में ही यह पता चल जाता है कि कोन जीत रहा है। 2016 में डोनाल्ड ट्रंप ने सुबह 3 बजे ही अपना विजयी भाषण दे दिया था। लेकिन इस बार चुनावी नतीजे आने में पहले से अधिक वक्त लग सकता है क्योंकि इस बार कोरोना की वजह से पोस्टल बैलट की संख्या में भारी इज़ाफा हुआ है।

कब लेगा नया राष्ट्रपति शपथ?

20 जनवरी तक नए राष्ट्रपति को शपथ लेनी होती है। इसके लिए वॉशिंगटन डीसी में भव्य आयोजन किया जाता है।

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