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US Election : जानिए क्यों हो रही अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों में देरी?

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अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव (US Election) के नतीजे फंस गए हैं। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव की काउंटिंग बीते कई घंटों से जारी है। इस बार कोरोनावायरस की वजह से बदले नियमों ने पूरी प्रक्रिया पर असर डाला है। आमतौर पर इलेक्शन-डे यानी जिस दिन वोटिंग होती है, उसी रात काउंटिंग हो जाती है और अगली सुबह तक दुनिया को नए राष्ट्रपति का नाम पता चल जाता है।

रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेट्स के उम्मीदवार जो बाइडेन के बीच हो रहे मुकाबले में ज्यादा समय लगने के पीछे की वजह मेल-इन वोट्स ही हैं। इस बार तकरीबन 16 करोड़ मतदाताओं ने राष्ट्रपति चुनने के लिए वोट डाले हैं। लेकिन, इसमें से लगभग दस करोड़ अमेरिकी वोटर्स मेल-इन के जरिए से पहले ही वोट डाल चुके थे।

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सारा मामला यहीं फंसा है। दस करोड़ मेल-इन वोट्स तीन नवंबर को पड़े छह करोड़ वोट्स की संख्या से कहीं अधिक है, जिसकी वजह से अमेरिकी चुनाव US Election के नतीजों को आने में अभी और समय लग सकता है।

दरअसल, वोटों की गिनती शुरू हुए घंटों बीत जाने के बाद भी अभी भी ज्यादातर जगहों पर मेल-इन वोट्स की गिनती शुरू नहीं हुई है। यानी कि ज्यादातर राज्यों ने उन वोटों को गिनना ही नहीं शुरू किया है, जिन्हें तीन नवंबर को हुए मतदान से पहले डाला गया था। विश्लेषकों की मानें तो मेल-इन वोटों की गिनती की वजह से कुछ राज्यों में तो कुछ दिन या कई राज्यों में सप्ताह भर का भी लग सकता है

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इस बार नतीजे लंबे फंस गए हैं

ऐसा सिर्फ कोरोनावायरस की वजह से हो रहा है। 68% वोटर्स ने अर्ली-वोटिंग की है यानी इलेक्शन-डे से पहले। अमेरिका में ऐसा होता भी है। कुछ स्टेट्स में इलेक्शन-डे से पहले वोटिंग की इजाजत है। इसमें वोटर्स को पोस्टल बैलेट देने की परमिशन भी है।

पोस्टल बैलेट की गिनती धीमी होती है क्योंकि वोटर और गवाह के दस्तखत और पतों का मिलान करना होता है। काउंटिंग मशीनों में डालने से पहले बैलेट्स की कई दौर की चेकिंग होती है। कुछ स्टेट्स ने इलेक्शन-डे से पहले ही वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू कर दी थी, ताकि इलेक्शन खत्म होने से पहले ही काउंटिंग शुरू हो सके। वहीं, कुछ स्टेट्स ने ऐसा नहीं किया।

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