ट्रंप और बाइडेन

US Election 2020 : अमेरिकी चुनाव में कैसे होती है वोटों की गिनती ?

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US Election 2020 : पूरी दुनिया इस समय अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव US President Election पर आंखे गड़ाए बैठी है। अमेरिका में कौन राष्ट्रपति होगा इसका असर केवल अमेरिका ही नहीं पूरी दुनिया पर होता है। इस बार के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से डोनाल्ड ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी की ओर से जो बाइडेन चुनावी मैदान में है। अमेरिका में दो ही पार्टी होती हैं इसलिए मुकाबला भी दो ही उम्मीदवारों के बीच है। अमेरिका में मतदान प्रक्रिया पूरी होने के बाद 3 नवंबर को चुनावी नतीजे घोषित हो जाएंगे।

यूं तो देश में ज्यादातर वोट पोलिंग स्टेशन पर पड़ते हैं, लेकिन इस साल कोरोना वायरस की वजह से इसमें बदलाव देखा जा सकता है। साल 2016 के चुनाव में ही 21% वोटरों ने पोस्ट से वोट डाला था। इस बार भी ऐसे देखने को मिल सकता है। ज्यादातर नेता पोस्टल बैलट के इस्तेमाल के लिए कह रहे हैं लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि इससे फ्राड की संभावना ज्यादा है। अमेरिका में अब तक 55 फीसदी या 9 करोड़ वोटर पहले ही मतदान कर चुके हैं।

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US President Election: कैसे होता है अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव?

अमेरिकी राष्ट्रपति का चुनाव (US Election 2020) सीधा नहीं होता। 18 साल से अधिक उम्र के लोग अपने राज्य का प्रतिनिधी चुनते हैं। हर राज्य के निर्धारित वोट होते हैं, जो वहां की जनसंख्या के आधार पर होते हैं। अमेरिका में अभी कुल 538 वोट हैं यानी अमेरिका राष्ट्रपति बनने के लिए उम्मीदवार को कम से कम 270 वोट जीतने होते हैं। इसे इलेक्टोरल कॉलेज कहते हैं। दोनो ही पार्टी के उम्मीदवार इलेक्टोरल कॉलेज के अधिक से अधिक वोट पाने की कोशिश करते हैं।

वोटर अपने राज्य के उम्मीदवारों को वोट करते हैं इसलिए कई बार किसी उम्मीदवार को वोट अधिक मिलते हैं लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज के अधिक वोट न जुटाने के चलते वह राष्ट्रपति नहीं बन पाता। पिछले चुनावों में हिलेरी क्लिंटन को देशभर में ट्रंप से ज्यादा वोट हासिल हुए थे लेकिन इलेक्टोरल कॉलेज ट्रंप के पास अधिक था।

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क्या अमेरिका में चुनाव बाद संवैधानिक संकट खड़ा होने वाला है?

अमेरिका में कुल 50 राज्य हैं। इन राज्यों की जनसंख्या के आधार पर यहां इलेक्टोरल वोट निर्धारित है। माना जाता है किसी राज्य के इलेक्टोरल वोट पाने के लिए उम्मीदवार को उस राज्य में अधिक से अधिक वोट जुटाने होते हैं। यानी जिस राज्य में वोट अधिक मिलेंगे वहां से इलेक्टोरल वोट भी अधिक मिल जाएंगे। इसीलिए अमेरिका के राष्ट्रपति के चुनाव में अलग अलग राज्यों में चुनावी डिबेट आयोजित की जाती हैं जहां उम्मीदवार अपनी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने के रैलिया करता है।

कहते हैं कि राज्यों का अलग-अलग पार्टी के तरफ झुकाव होता है। ऐसे में उम्मीदवार को जीत के लिए बड़ी मश्क्कत करनी होती है। भारत की ही तरह बड़े राज्य जहां इलेक्टोरल वोट अधिक हैं चुनवा का रुख तय करते हैं। जैसे कैलिफोर्निया और टेक्सस राज्य में सबसे अधिक वोट हैं जैसे भारत में बिहार और यूपी। इन राज्यों में जीतने वाले उम्मीदवार की जंग आसान हो जाती है।

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