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मध्यप्रदेश में गहराया यूरिया संकट, 250 की बोरी 400 में खरीद रहा किसान

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न्यूज़ डेस्क।। प्रधानमंत्री के तमाम दावों के बाद भी कृषि कर्मण राज्य मध्यप्रदेश में यूरिया का संकट खत्म नहीं हुआ है। बोवनी हो चुकी है और किसान अपनी फसल बचाने के लिए यूरिया खरीदने निकल पड़ा है। लेकिन बाज़ार में यूरिया के लिए हाहाकार मचा हुआ है। व्यापारियों का कहना है यूरिया नहीं है जाओ घर। किसी व्यापारी के पास अलबत्ता यूरिया मिल भी गयी तो किसान दोगुने भाव चुकाने को मजबूर है।

शिवराज सिंह चौहान के अपने जिले सीहोर में पड़ने वाली आष्टा तहसील में एक किसान ने ग्राउंड रिपोर्ट को बताया कि “साब अभी यूरिया की दरकार है, अगर नहीं मिली तो फसल बर्बाद हो जाएगी। इसलिये अगर 250 की बोरी 1000 में भी मिलेगी तो हमें खरीदनी ही पड़ेगी। अगर सही समय पर यूरिया खेतों में नहीं डाली तो सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा”

किसान ने यूरिया संकट का एक कारण यह बताया कि जब बाज़ार में यूरिया की मांग बढ़ती है, तो व्यापारी अपने गोडाउन में यूरिया दबा कर रखता है और ऐसा माहौल बनाता है कि यूरिया नहीं बची और फिर मनमाने भाव में यूरिया बेचता है।

बड़े व्यापारी छोटे व्यापारियों को बड़े भाव में यूरिया बेचते हैं, फिर छोटा व्यापारी और भाव बढ़ाकर किसान को यूरिया बेचता है। किसान मजबूरी में मनमाने भाव चुकाता है।

प्रधानमंत्री मोदी अपनी हर रैली में यह कहने से नहीं चूकते की उन्होंने देश से यूरिया संकट दूर कर दिया है। और कैसे यूरिया की नीम कोटिंग से किसानों की लागत में कमी आई है। लेकिन ज़मीन पर यह दावा भी खोखला साबित हो रहा है। राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, मोदी जी के इस दावे की हवा निकालने में लगे हुए हैं। अगर बड़े व्यापारियों के गोडाउन पर छापेमारी की जाए तो यूरिया संकट दूर हो सकता है। लेकिन प्रशासन तो चुनाव की तैयारी में जुटा है। किसे फर्क पड़ता है, सरकार बन गई तो कर्ज माफी का रामबाण चलाकर किसान के दर्दों पर मलहम सरकार लगा ही देगी।