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6 साल पहले मर चुके ‘बन्ने खान’ भंग कर सकते थे शांति, यूपी पुलिस ने 107 और 116 के तहत मामला दर्ज कर भेजा नोटिस

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ग्राउंड रिपोर्ट । नेहाल रिज़वी

पिछले कुछ समय से यूपी पुलिस की बर्बरता को लेकर देश और दुनिया में चर्चा हो रही है। सीएए (Citizenship Amendment Act) और एनआरसी ( National Register of Citizens ) को लेकर /उत्तर प्रदेश में विरोध कर रहे लोगों पर जिस बर्बरता से कार्रवाई  की, जिसके चलते यूपी पुलिस का एक सांप्रदायिक चेहरा दुनिया के सामने आया । सरकार ने पुलिस का जिस ग़लत ढ़ंग से इस्तेमाल कर एक खास समुदाय के साथ बर्बर कार्रवाई  या जिसे बदला भी कहा जाए तो उचित होगा, की उसने हमारे देश के संविधान और क़ानून को तार-तार कर के रख दिया।

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उत्तर प्रदेश पुलिस का क़ानूनी कार्रवाई के नाम पर एक और झूठ सामने आया है। पुलिस ने नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर प्रदेश में हो रहे प्रदर्शनों के मद्देनज़र शांति भंग कर सकने वाले लोगों की सूची तैयार की थी। फ़िरोज़ाबाद में 20 दिसंबर को हुए प्रदर्शन और हिंसा के बाद पुलिस ने ऐसे 200 लोगों को चिह्नित कर नोटिस भेजे, जिनमें एक मृत व्यक्ति और शहर के कुछ बुज़ुर्गों के भी नाम नोटिस भेज दिया।

अंग्रेज़ी के अख़बार द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, यूपी पुलिस ने फिरोज़ाबाद में बन्ने खान नामक एक ऐसे व्यक्ति के घर नोटिस भेजा, जिनकी मौत हुए 6 साल बीत चुके हैं। उनके बेटे मोहम्मद सरफराज खान ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि,

‘मेरे पिता, जो छह साल पहले गुज़र चुके हैं, पर पुलिस ने सीआरपीसी की धारा 107 और 116 के तहत मामला दर्ज किया है क्योंकि उन्हें लगता है कि वे सार्वजनिक शांति भंग कर सकते हैं।’

बीते सोमवार को पुलिस सरफराज़ के घर पहुंची और उन्हें नोटिस थमा दिया। सरफराज बताते हैं,

‘उन्होंने कहा कि मेरे पिता को मजिस्ट्रेट के सामने पेश होना होगा और सात दिन के अंदर जमानत लेनी होगी वरना उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। जब मैंने उन्हें मेरे पिता का डेथ सर्टिफिकेट दिखाया तो उन्होंने मुझे डांट दिया।’

शहर के कोटला मोहल्ला के 93 साल के फ़साहत मीर खान और कोटला पठान के 90 वर्षीय सूफी अंसार हुसैन को भी इसी तरह का नोटिस थमाया गया। परिजनों के अनुसार यह दोनों बुजुर्ग बिना मदद के चल-फिर भी नहीं सकते हैं। 20 दिसंबर को नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के बाद हुई हिंसा के बाद शहर में पुलिस ने ऐसे 200 लोगों की पहचान की, जिनसे फिरोजाबाद की शांति को खतरा है।

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सरकार इस तरह के कदम नागरिकता कानून को लेकर हो रहे प्रदर्शनों के मद्देनजर उठा रही है। पुलिस द्वारा शांति भंग कर सकने वाले लोगों को सूचीबद्ध किया है। इन लोगों पर सीआरपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज होता है और इन्हें निजी मुचलके पर जमानत लेनी होती है। इसका उल्लंघन होने पर उन्हें फाइन भरना होता है।

पुलिस अब आना-कानी करती नज़र आ रही है

वहीं इस बारे में सिटी मजिस्ट्रेट पंकज सिंह ने कहा कि 20 दिसंबर को फिरोज़ाबाद में हुई हिंसा भड़कने के बाद हमारे ऊपर बहुत दबाव था। जिन लोगों के नाम गलत तरीके से धारा 107 और 116 के तहत सूचीबद्ध हुए हैं, हम उन्हें हटा सकते हैं।

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