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यूपी पुलिस रीढ़ की हड्डी में नाली के गंदे पानी का इंजेक्शन लगाती है : प्रशांत कनौजिया

ऐक्टिविस्ट और स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया
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अपने सोशल मीडिया पोस्ट और कॉमेंट्स के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले ऐक्टिविस्ट और स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया हालही में जेल से छूट कर आए हैं। सोशल मीडिया पर एक फेक पोस्ट शेयर करने के चलते उन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। हाईकोर्ट से बीते दिनों उन्हें ज़मानत मिली है। द प्रिंट को दिए अपने एक साक्षात्कार में प्रशांत ने जेल में पुलिस की प्रताड़ना का एक कड़वा सच सामने रखा है।

अपनी गिरफ़्तारी को लेकर प्रशांत कनौजिया कहते हैं कि उनकी गिरफ्तारी ट्वीट के चलते नहीं, बल्कि उनकी आवाज़ को दबाने के लिए की गई थी। ट्वीट तो महज़ गिरफ्तारी का एक बहाना है। प्रशांत कनौजिया आगे कहते हैं कि ये सरकार दमनकारी है। जो लोग सरकार से सवाल करते हैं। जो लोग सरकार से बिना डरे अपनी बात कहते हैं। सरकार उन लोगों को टारगेट करती है। ख़ासकर करके उत्तर प्रदेश सरकार इस तरह के ”टारगेटेड अटैक” में सबसे आगे नज़र आती है। उनकी गिरफ्तारी भी इस टारगेटेड अटैक का ही हिस्सा है।

पुलिस नाली के गंदे पानी का इंजेक्शन लगाती है!

द प्रिंट से अपने जेल के अनुभव पर बात करते हुए प्रशांत कनौजिया कहते हैं कि जेल में पहुंचने का बाद ”अंजनी पाण्डे नाम” के एक पुलिस ऑफिसर ने उन्हें थर्ड डिग्री का टार्चर दिया। पुलिस ने उन्हें खाने-पीने के लिए भी कुछ नहीं दिया। पुलिस ने प्रशांत के कान में क्लिप लगाकर इलेक्ट्रिक शॉक दिए। प्रताड़ना की सारी हदे पार की। प्रशांत ने द प्रिंट से बात-चीत में खुलासा किया कि यूपी पुलिस क़ैदियों को प्रताड़ित करने के लिए उनकी रीढ़ की हड्डी में नाली के गंदे पानी का इंजेक्शन लगाती है।

हाईकोर्ट तक पहुंचते-पहुंचते मर जाता है ग़रीब

देश के लीगल सिस्टम पर बात करते हुए प्रशांत बताते हैं कि भारत में न्याय पाना इतना महंगा है कि कोई ग़रीब इसके ख़र्च नहीं उठा सकता। ग़रीब आदमी ”लोअर जूडिशरी” में ही चक्कर काट-काट करके मार जाता है। प्रशांत आगे बताते हैं कि लोगों द्वारा की गई आर्थिक मदद के चलते ही वो हाईकोर्ट से ज़मानत पा सके। साथ ही प्रशांत ने अपनी बीवी जगीशा अरोड़ा का शुक्रिया अदा किया और जगीशा को अपनी रिहाई के में सबसे अहम बताया।

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Why reservation is still necessary to uplift the depressed classes?

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