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बिना परमिशन पदयात्रा करने पर यूपी पुलिस ने भेजा जेल

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उत्तर प्रदेश पुलिस ने सीएए के विरोध में नागरिक सत्याग्रह पदयात्रा निकाल रहे कुछ छात्रों और पत्रकारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस ने इन लोगों पर धारा 107/116 के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा है। इन छात्रों और पत्रकारों की पदयात्रा चौरी चौरा से शुरू होकर दिल्ली के राजघाट पर समाप्त होनी थी मगर यूपी के ग़ाज़ीपुर में पहुंचते ही इन लोगों के पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया।

हिंसा प्रभावित जगहों पर पहुंचकर गांधी का संदेश देने निकले थे

गत दिसंबर महीने यूपी के अधिकतर ज़िलों में सीएए और एनआरसी को लेकर काफ़ी हिंसक प्रदर्शन हुए थे जिसमें 23 लोगों की मौत भी हो गई थी। बीएचयू के कुछ छात्रों और पत्रकारों ने मिलकर एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी बनायी। इस टीम ने तय किया की सीएए के विरोध में हिंसा प्रभावित जगहों पर पहुंचकर गांधी का संदेश देंगे। ये सभी लोग चौरी चौरा से दिल्ली के राजघाट के लिय निकले थे।

2 फरवरी 2020 को चौरीचौरा से ये लोगों की यात्रा निकली थी। चौरीचौरा से इसलिए क्योंकि ये वह जगह थी जहां 1922 में अंग्रेजों के खिलाफ हुई हिंसा के बाद गांधी ने असहयोग आंदोलन वापस ले लिया था। लगभग 200 किमी की पदयात्रा करके ये छात्र मऊ से आगे बढ़कर गाजीपुर पहुंचे थे। पुलिस ने इन सभी को ग़ाज़ीपुर से गिरफ्तार कर लिया।

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जनता को भ्रामक संदेश देते हुए गुमराहकर भड़का रहे हैं : पुलिस

पुलिस ने सभी की गिरफ्तारी को लेकर कहा कि ये लोग बिना परमिशन के पदयात्रा कर रहे थे। CAA और NRC के संबंध में लोगों / जनता को भ्रामक संदेश देते हुए गुमराहकर भड़का रहे हैं, जिससे शान्ति भंग होने की प्रबल संभावना है। इस कृत्य से जनता में वैमनस्य पैदा होगा तथा संज्ञेय अपराध घटित हो सकता है। इसके चलते हमने सूचना मिलने पर इन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया।

इस गिरफ्तारी के बाद पुलिस की कारवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। गिरफ्तारी की विरोध भी शुरू हो गया है। जाने-माने रंगकर्मी और पत्रकार चंचल ने पुलिस की भूमिका पर कई सवाल खडे करते हुए पूछा है कि- चौरीचौरा गोरखपुर जिले में है। वहां के प्रशासन ने इन सत्याग्रही पदयात्रियों से कोई बदसलूकी नहीं की, न ही गिरफ्तार किया। अचानक गाजीपुर की शांति कैसे भंग हो गई?

ज़मानत के लिय ढाई ढाई लाख की मांग ।

पुलिस का आरोप है कि इन लोहों ने CAA के विरोध में पर्चे बांटे। जम्हूरी निजाम में असहमत होना संवैधानिक हक है। विरोध करना जायज है अगर वह शांतिपूर्ण है। गाजीपुर का प्रशासन संविधान के खिलाफ क्यों खड़ा हो रहा है? ज़मानत के सवाल पर आप ढाई ढाई लाख की संपत्ति के दो मालिकान की मांग की है। हमने उन्हें मुचलके पर छोड़ने की बात की तो उस समय SDM सहमत हो गए।

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