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योगी सरकार के नए आदेश के बाद मज़दूर अब सड़कों पर पैदल नहीं चल पाएंगे..

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Ground Report News Desk

देशभर में पिछले कुछ दिन प्रवासी मज़दूरों के लिए सबसे बुरे ग़ुज़रे हैं । बीते 48 घंटो में घर वापसी के लिए निकले 60 मज़दूर हादसों का शिकार होकर अपनी जान गंवा बैठे । 60 से ज़्यादा मज़दूरों की सड़कों पर कुचल कर हुई मौत के बाद योगी सरकार ने शहरों की सीमाएँ सील कर पैदल या अन्य गाड़ियों से आ रहे मज़दूरों को रोक दिया है।

मुख्य सचिव आरके तिवारी ने शनिवार दोपहर एक आदेश जारी कर पैदल, मिनी ट्रक, ट्रक, मेटाडोर, ऑटो, साइकिल या किसी अन्य निजी वाहन से मज़दूरों के आने पर रोक लगा दी है, आदेश में पुलिस कप्तानों पर ज़िलाधिकारियों से कहा गया है कि उन्हें 200 बसें प्रत्येक ज़िले में दी जाएँगी जिससे मज़दूरों को उनके घर तक भेजा जा सके, मुख्य सचिव के इस आदेश के बाद लखनऊ की सीमा को सील कर दिया गया है।

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शनिवार तड़के उत्तर प्रदेश में कानपुर के क़रीब औरैय्या में ज़बरदस्त सड़क दुर्घटना में अपने घर को लौट रहे 26 मज़दूरों की मौत हो गयी थी। इसके तुरंत बाद मध्य प्रदेश से आ रहे यूपी के पाँच मज़दूर बांदा में सीमा पर कुचल कर मारे गए। शनिवार दोपहर में आगरा एक्सप्रेस वे पर उन्नाव के बांगरमऊ में दो मज़दूर कुचल कर मर गए। प्रयाग में घर वापसी कर रहे एक मज़दूर की मौत दुर्घटना में हो गयी। इससे पहले के 24 घंटों में अलग-अलग घटनाओं में 26 मज़दूरों की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी थी।

उधर कांग्रेस महासचिव और यूपी प्रभारी प्रियंका गाँधी ने शनिवार दोपहर मुख्यमंत्री को पत्र भेज माँग की कि उन्हें नोयडा और गाज़ियाबाद बॉर्डर से 500-500 बसें चलाने की इजाज़त दी जाए। प्रियंका ने मज़दूरों को भेजने के सरकारी प्रयासों को नाकाफ़ी बताते हुए पार्टी की ओर से बसें चलाने की इजाज़त माँगी। प्रियंका की चिट्ठी लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ख़ुद मुख्यमंत्री कार्यालय गए। देर रात तक कांग्रेस को बसें चलाने की इजाज़त नहीं दी गयी थी।

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यदि भारत सरकार के लिए कड़ा लॉकडाउन ही एकमात्र विकल्प था, तो कम से कम यह किया जा सकता था कि आबादी के सबसे कमजोर वर्गों के लिए बेहतर योजना बनाई जा सके। ये लॉकडाउन से जुड़ी मानवीय त्रासदी के पैमाने को दर्शाता हैं। अब हम लॉकडाउन के तीसरे चरण में है । इस नुकसान को स्वीकार करने और इस मानवीय संकट को दूर करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की तत्काल आवश्यकता है।

विश्व स्वास्थ संगठन WHO ने साफ कहा है कि लॉकडाउन कोरोना से लड़ने के लिए एक मात्र रास्ता नहीं है । कोरोना की रोकथाम में सबसे अहम रोल है टेस्टिंग करना । मगर भारत में टेस्टिंग की चाल किसी कछुए की तरह चल रही है । भारत जैसा देश लंबा लॉकडाउन के लिए सक्षम नहीं है। कोरोना के मामले लगातार तेज़ी से बढ़ रहे हैं । सरकार भी जानती है कि वो लॉकडाउन को चाह कर भी लंबा नहीं ले जा सकती है ।

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