कानपुर

औधोगिक नगरी से ‘हत्याओं की नगरी’ बना कानपुर, पत्थरों से कुचलकर पति-पत्नी की हत्या

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कानपुर : उत्तर प्रदेश में क्राइम का ग्राफ इतनी तेज़ी से बढ़ रहा कि सूबे की योगी सरकार भी इसको लेकर लगातार घिरती नज़र आ रही है। प्रदेश में अपहरण, फिरौती और हत्या की बढ़ती घटनाओं ने क़ानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करना शुरू कर दिए हैं। शायद ही ऐसा कोई दिन गुज़रा हो जब यूपी में किसी की हत्या न हुई हो।

पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश का एक शहर कानपुर, क्राइम की घटनाओं को लेकर लगातार चर्चा में बना हुआ है। विकास दुबे का मामला हो या कानपुर में अपहरण के बाद हुई हत्या का मामला। यूपी में रोज़ाना सरेआम हो रहीं हत्याओं से साफ नज़र आता है कि अपराधियों में क़ानून का कोई ख़ौफ नहीं नज़र आता है।

कानपुर बन गया हत्याओं का शहर

ताज़ा मामला कानपुर के रेलबाज़ार थाना क्षेत्र के लोको ग्राउंड का है, जहां सोमवार तड़के पति पत्नी की पत्थरों से कुचलकर बेरहमी से हत्या कर दी गई। डबल मर्डर की सूचना पर पहुंची पुलिस ने छानबीन शुरू कर दी है। पति के सिर पत्थर से कुचलकर और पत्नी की गला दबाकर हत्या की गई है। पत्नी के कपड़े और घर का सामान अस्त व्यस्त मिला है।

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मूल रूप से बस्ती केरला निवासी रामदीन निषाद रेलवे में कॉन्ट्रैक्ट पर पेंटिंग का काम करते हैं और रेलवे स्टेडियम में पवेलियन के नीचे बने क्वार्टर में वर्षों से रह रहे हैं। परिवार में उनकी पत्नी कुसुम, चार बेटे विष्णु, सूरज, शिवा, नंदी व दो बेटियां प्रीति व नंदिनी हैं।

रामदीन के मुताबिक रविवार रात करीब 9:00 बजे वह कमरे पर पहुंचे तो बेटा-बहू बाहर ही बैठे थे। बहू शालू ने खाना दिया, जिसे खाने के बाद वे अपने कमरे में सोने चले गये। रात करीब 11:30 बजे आवाज दी तो बेटे ने पानी लाकर उसे पिलाया। इसके बाद क्वार्टर के बाहर मैदान में चटाई बिछाकर सोने चले गए। सोमवार सुबह 7:00 बजे रामदीन की नींद खुली तो कमरे का सामान बिखरा पड़ा था और बेटे-बहू का रक्तरंजित शव पड़े थे।

पुलिस ने लूटपाट की जताई आशंका

इसपर उन्होंने पुलिस को फोन पर सूचना दी। एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने बताया कि कमरे का सामान बिखरा होने लूटपाट की आशंका जताई जा रही है। मृतकों के मोबाइल फोन को कब्जे में लेकर जांच की जा रही है। शालू की पहली शादी के बिंदु पर भी जांच कराई जा रही है, जल्द वारदात का राजफाश होगा।

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अब बड़ा सवाल ये है कि यूपी में तेज़ी से बढ़ते क्राइम को रोकने में योगी सरकार पूरी तरह से विफल होती क्यों नज़र आ रही है ? अपराधियों को न हो पुलिस का डर है और न ही किसी तरह के का़नून की परवाह। कानपुर में जिस प्रकार से पिछले कुछ दिनों से क्राइम बढ़ा है, उसको देखते हुए तो यही नज़र आता है कि पुलिस प्रशासन पूरी तरह से क्राइम कंट्रोल करने में विफल ही रहा है।

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