जनरल क़ासिम सुलेमानी की हत्या के बाद मध्य पूर्व में फैल सकती है अशांति, भारत पर भी असर!

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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

ईरान की क़ुद्स फ़ोर्स के प्रमुख जनरल क़ासिम सुलेमानी बग़दाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हवाई हमले में मारे गए हैं। इस हमले की ज़िम्मेदारी अमरीका ने ली है। अमेरिकी रक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने शुक्रवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश से ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के सबसे शक्तिशाली कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी को अमेरिकी हवाई हमले में मार दिया गया है। इस हमले में कताइब हिज़बुल्लाह के कमांडर अबू महदी अल-मुहांदिस भी मारे गए हैं। अमेरिका के इस कदम से दोनों देशों के साथ ही खाड़ी क्षेत्र में तनाव बहुत तेज़ी से बिगड़ने की संभावना बन गई है।

पेंटागन ने बयान देते हुए कहा-

‘विदेश में अमेरिकी कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट रक्षात्मक कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सेना ने राष्ट्रपति के निर्देश पर ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर-कुद्स फोर्स के प्रमुख कासिम सुलेमानी को मार गिराया। इस संगठन को अमेरिका ने प्रतिबंधित विदेशी आतंकवादी संगठन की सूची में डाल रखा है।’

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा-

‘जनरल सुलेमानी सक्रिय रूप से इराक में अमेरिकी राजनयिकों और सैन्यकर्मियों पर हमले की सक्रिय रूप से योजना बना रहा थे। जनरल सुलेमानी और उसका ईरानी कुद्स फोर्स सैकड़ों अमेरिकियों और अन्य गठबंधन सहयोगियों के सदस्यों की मौत और हजारों को जख्मी करने के लिए जिम्मेदार हैं।’

जनरल सुलेमानी ने बीते दिनों बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमलों की भी अनुमति दी। अमेरिका दुनिया भर में अपने लोगों और उनके हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाना जारी रखेगा।’

जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत मध्य-पूर्व से जुड़ी एक बड़ी घटना बताई जा रही है और आशंका यह भी जताई गई है कि ईरान और इसकी समर्थित मिडिल ईस्ट ताक़तें अब इसराइल और अमरीका के ख़िलाफ़ ज़ोरदार जवाबी कार्रवाई करेंगी। बीते रविवार को ही अमरीका ने पूर्वी सीरिया और पश्चिमी इराक़ में स्थित कताइब हिज़बुल्लाह संगठन के ठिकानों को निशाना बनाया था। जिसमें कम से कम 25 लड़ाके मारे गए थे।

कौन थे जनरल क़ासिम सुलेमानी ?

जनरल कासिम सुलेमानी का जन्म 11 मार्च 1957 में इरान में हुआ था। सुलेमानी कारमन से फारसी थे और उनके पिता एक किसान थे जिनका 2017 में निधन हो गया था। सुलेमानी साल 1979 में ईरानी क्रांति के बाद रिवोल्यूशनरी वॉर गार्ड (IRGC) में शामिल हो गए।

22 सितंबर 1980 को जब सद्दाम हुसैन ने ईरान पर आक्रमण शुरू किया तब सुलेमानी एक मिलिट्री कंपनी के लीडर के रूप में युद्ध के मैदान में शामिल हुए। जिसमें करमान के लोग भी शामिल थे। इसके बाद वह 41 वें सरला डिवीजन के कमांडर बन गए। 62 साल के जनरल कासिम सुलेमानी न केवल ईरान में बल्कि सीरिया, लेबनान और इराक के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक थे। सुलेमानी तब से बगदाद में है जब हाल ही में पिछले महीने पार्टियों ने नई सरकार बनाने की मांग की थी।

पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा

जनरल सुलेमानी ईरानी की एक ख़ास शख़्सियत थे। उनकी क़ुद्स फोर्स सीधे देश के सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह अली ख़ामेनेई को रिपोर्ट करती है। सुलेमानी की पहचान देश के वीर के रूप में थी।सुलेमानी को पश्चिम एशिया में ईरानी गतिविधियों को चलाने का प्रमुख रणनीतिकार माना जाता रहा है। क़ुद्स फोर्स के कमांडर जनरल क़ासिम सुलेमानी को ईरान के सुप्रीम लीडर आयतोल्लाह अली ख़ामनेई ने ‘अमर शहीद’ का ख़िताब दिया है।

सुलेमानी को एक बार ऑर्डर ऑफ जोलफाघर और तीन बार ऑर्डर ऑफ फेथ से भी नवाजा जा चुका है। अमेरिकी की कासिम सुलेमानी पर लंबे समय से नजर थी और यूएस ने सुलेमानी को बैन कर रखा था। कासिम सुलेमानी ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खोमैनी के करीबी थे और ईरान की स्पेशल आर्मी रिवॉल्यूशनरी गार्ड की कुद्स आर्मी के चीफ थे। अमेरिका ने कुद्स आर्मी को आतंकी संगठन बताते हुए बैन कर रखा था। अमेरिका के मुताबिक, कुद्स फोर्स इराकी और अमेरिकी सेना की हत्या का जिम्मेदार है और अमेरिका के खिलाफ लगातार कार्रवाई में शामिल रहा है।

ट्रंप के इस फैसले का उनकी पूर्व कैबिनेट सहयोगी एवं संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका दूत भारतीय मूल की अमेरिकी नागरिक निक्की हेली ने समर्थन किया है।

ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने जनरल क़ासिम सुलैमानी की मौत पर दुख ज़ाहिर करते तीखे शब्दों में कहा है कि अमेरिका को इसकी भारी क़ीमत चुकानी होगी। जिन्होंने ये हमला अजाम दिया है उनका इंतेज़ार मौत ने शुरू कर दिया है। इस बीच, शुक्रवार को ही ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने जो सुप्रीम कमांडर-इन-चीफ़ भी हैं, आईआरजीसी की क़ुद्स फ़ोर्स के डिप्टी कमांडर इस्माईल क़ानी को जनरल सुलेमानी की जगह क़ुद्स फ़ोर्स का चीफ़ कमांडर नियुक्त किया है।

तेहरान के इमामे जुमा आयतुल्लाह सैय्यद अहमद ख़ातेमी ने अमरीकी हमले में मेजर जनरल क़ासिम सुलेमानी की शहादत पर चेतावनी देते हुए कहा है कि विश्व में अब अमरीकियों को कहीं शांति नसीब नहीं होगी। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि इस पूरे इलाक़े को दुश्मनों से पाक किया जाए। जुमे की नमाज़ के ख़ुतबों में अहमद ख़ातेमी का कहना था कि जनरल सुलेमानी ने प्रतिरोध की दुनिया में एक नया इतिहास रचा है और दाइश के विनाश में अहम भूमिका निभाई है।

इराक़ी हिज़्बुल्लाह ने क़ासिम सुलेमानी की मौत पर बयान देते हुए कहा है कि,’अमेरिकी सैनिकों को तुरंत इराक़ से निकल जाना चाहिये। इराक के हिज्बुल्लाह बिग्रेड के प्रवक्ता ने कहा है कि बग़दाद में अमेरिकी दूतावास के सामने होने वाले प्रदर्शनों ने दर्शा दिया कि इराकी लोग चाहते हैं कि अमेरिकी सैनिक जल्द से जल्द उनके देश से चले जायें’।

अंतरराष्ट्रीय मार्केट में तेल की क़ीमतों में 4 प्रतिशत का उछाल

सुलेमानी की मौत के बाद अंतरराष्ट्रीय मार्केट में तेल की क़ीमतों में 4 प्रतिशत का उछाल आया है। अमरीका के इस हमले से मध्यपूर्व में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जिससे तेल की स्पलाई में रुकावट उत्पन्न हो सकती है। ब्रेंट क्रूड की क़ीमत क़रीब 3 डॉलर बड़कर 69.16 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जो 17 सितंबर के बाद सबसे ज़्यादा है। अमरीका और उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ ईरान की जवाबी कार्यवाही के मद्देनज़र अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार सहमा हुआ है।

आईआरजीसी के डिप्टी कोआर्डिनेटर मुहम्मद रज़ा नक़दी ने जनरली सुलैमानी की शहादत पर प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए कहा कि, ‘अमरीका को इसी समय से इस्लामी जगत से अपनी छावनियां खाली करना शुरु कर देना चाहिए और या फिर अपने सैनिकों के लिए ताबूत तैयार कराना शुरु कर दे। वह सबक़ सिखाएंगे कि कोई अमरीकी राष्ट्रपति उसे भूल नहीं पाएगा, ईरान का वह जनरल जिसका लोहा अमरीकी भी मानते थे’।

वीर सावरकर कितने वीर? किताब पर विवाद

इसी के साथ उन्होंने कहा कि इस्राईल, या तो अपना बोरिया बिस्तर समेट कर युरोप चला जाए कि जहां से वह आया था या फिर हमारे निर्णायक क़दक के लिए तैयार रहे। उन्होंने कहा कि हम रक्तपात नहीं चाहते, लेकिन राह का उन्हें ही चयन करना।

आईआरजीसी के डिप्टी कोआर्डिनेटर मुहम्मद रज़ा नक़दी बताते है कि-स्कॉट बेन्ट अमरीकी टीकाकार हैं जो सनफ्रांसिस्को में रहते हैं। वह अमरीकी सेना में अफसर भी थे। उन्होंने ईरान की तस्नीम न्यूज़ एजेन्सी से एक वार्ता में आईआरजीसी के क़ुद्स ब्रिगेड के कमांडर, जनरल क़ासिम सुलैमानी के बारे में बात करते हुए कहा था कि जनरल सुलैमानी अपने कूटनैतिक और सैनिक प्रभाव की वजह से अमरीका और इस्राईल की साज़िशों को नाकाम बनाने में सफल हुए हैं।

अमेरिकी एयरस्ट्राइक में ईरानी कद्स फोर्स के हेड जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद ईरान गुस्से में है। ईरानी राष्ट्रपति हसन रुहानी ने ट्वीट कर अमेरिका से बदला लेने की धमकी दी है। वहीं अमेरिकी दूतावास ने बगदाद में स्थित अपने सभी नागरिकों को तुरंत इराक छोड़ने के लिए कहा है।

अमेरिकी नागरिक तत्काल इराक से निकलें

बगदाद में हालात को बिगड़ते देख अमेरिकी दूतावास ने बगदाद और आस-पास के इलाकों में मौजूद अपने सभी अमेरिकी नागरिकों से तुरंत प्रभाव से इराक छोड़ने के लिए कहा है। साथ ही एक प्रेस रिलीज में अमेरिकी दूतावास ने सभी नागरिकों को तीन बातों का भी ध्यान रखने के लिए कहा है।

ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने ट्वीट किया कर इस हमले को ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी कार्रवाई’ क़रार देते हुए कहा कि ‘इस दुष्टतापूर्ण शरारत’ की पूरी ज़िम्मेदारी अमेरिका की है।  ईरानी सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि रक्षा विभाग के आला अफ़सरान जल्द ही एक बैठक कर यह तय करेंगे कि वाशिंगटन को इस ‘आपराधिक हमले’ के लिए क्या ‘सज़ा’ दी जाए।

ईरानी कमान्डर के मारे जाने पर भारत में भी होगा इसका असर?

बग़दाद में हुए ड्रोन हमले का असर नई दिल्ली पर भी पड़ेगा। अमेरिकी भले ही भारत को इससे अलग रखने की बात कहे या कोशिश भी करे, पर भारत इससे अलग नहीं हो सकता। अमेरिकी हमले में ईरानी कमान्डर क़ासिम सुलेमानी की मौत एक सामान्य घटना नहीं है।

ईरान-भारत का सदियों पुराना नाता

ईरान के साथ भारत का सदियों पुराना नाता तो है ही, हाल के वर्षों में भी तेहरान और नई दिल्ली के बीच नज़दीकियाँ बढ़ी हैं। इसे इससे भी समझा जा सकता है कि कश्मीर के मुद्दे पर भी ईरान ने कभी भी पाकिस्तान का साथ नहीं दिया, वह भारत के साथ ही रहा है।

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