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उज्जैन महाकालेश्वर जाएंगे तो अब आपको ये 8 बदलाव दिखाई देंगे

उज्जैन महाकालेश्वर अभिषेक के नए नियम
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उज्जैन महाकालेश्वर शिवलिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर प्रशासन को आठ सुझावों पर अमल करने को हरी झंडी दी है। उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में पूजा और भस्म आरती की वजह से शिवलिंग को हो रहे नुकसान को लेकर 2017 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। इसमें शिवलिंग को नुकसान से बचाने के लिए गाइडलाइन जारी करने की मांग की गई थी।

क्या हैं महाकालेश्वर अभिषेक के लिए सुप्रीम कोर्ट के 8 सुझाव?

  • शिवलिंग पर श्रद्धालु 500 मिलीलीटर से ज्यादा जल नहीं चढ़ाएंगे। जल सिर्फ आरओ का होगा।
  • भस्म आरती के दौरान शिवलिंग को सूखे सूती कपड़े से पूरा ढका जाएगा। अभी तक 15 दिनों के लिए शिवलिंग को आधा ढका जाता था।
  • अभिषेक के लिए हर श्रद्धालु को 1.25 लीटर दूध या पंचामृत चढ़ाने की इजाजत होगी।
  • शिवलिंग पर घी, चीनी का पाउडर लगाने की इजातत नहीं होगी, बल्कि देसी खांड के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • नमी से बचाने के लिए गर्भ गृह में ड्रायर और पंखे लगाए जाएंगे।
  • बेल पत्र और फूल पत्ती शिवलिंग के ऊपरी भाग पर ही चढ़ाए जाएंगे, ताकि शिवलिंग के पत्थर को प्राकृतिक हवा पहुंचने में कोई दिक्कत न हो।
  • शाम पांच बजे के बाद अभिषेक पूरा होने के बाद शिवलिंग की पूरी सफाई होगी और इसके बाद सिर्फ बिना जल के अन्य चीजों से पूजा होगी।
  • सीवर सफाई के लिए चल रही पारंपरिक तकनीक ही चलती रहेगी क्योंकि सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के बनने में लंबा समय लगेगा।
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क्यों खास हैं उज्जैन के महाकालेश्वर?

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग देश के सर्वप्रमुख 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह विश्व का एक मात्र ऐसा शिव मंदिर है जहाँ दक्षिणमुखी शिवलिंग प्रतिष्ठापित है।। यहां हर रोज ब्रह्म मुहुर्त में सुबह भोलेनाथ का भस्म से श्रृंगार किया जाता है। प्रचलित मान्यता के अनुसार यहां श्मशान की ताजी चिता की भस्म से आरती की जाती थी। लेकिन वर्तमान में कंडो की भस्म से आरती होती है। यहां भस्म आरती के दर्शन केवल पुरुष ही कर सकते हैं। भस्म आरती से पहले भगवान शिव को जल चढाया जाता है। इस मंदिर में गणेश, पार्वती और कार्तिकेय की प्रतिमा को भी पश्चिम, उत्तर और पूर्व में स्थापित किया गया है। दक्षिण की तरफ भगवान शिव के वाहन नंदी की प्रतिमा भी स्थापित की गयी है।

लगातार अभिषेक और दूध घी के चढ़ावे की वजह से शिवलिंग को निकसान हो रहा था। यह माना जा रहा था कि अगर कड़े नियम नहीं लागू हुए तो शिवलिंग का आकार घटता चला जाएगा। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 8 नियमों के पालन का आदेश दिया है।

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