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Uber files leak : ’उबर फाइल्स’ पर क्यों मचा हंगामा, जांच में क्या-क्या सामने आया; देखें

Uber cab service

Uber files leak : ‘उबर फाइल्स’ को लेकर हंगामा मच गया है। दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी उबर (Uber) पर बेहद ही गंभीर आरोप लगे हैं। कंपनी से जुड़े कुछ 1.12 लाख से अधिक दस्तावेज लीक हो गए हैं, जिन्हें उबर फाइल्स (Uber files leak) कहा जा रहा है। उबर कैब सेवा (Uber cab service) मुहैया कराने वाली एक गलोबल कंपनी है। जांच में सामने आया है कि कंपनी ने भारत समेत दुनियाभर में अपना कारोबार बढ़ाने के लिए कानून तोड़े। अनैतिक साधनों का इस्तेमाल किया। उबर फाइल्स क्या हैं और इनमें क्या-क्या सामने आया, आइए जानते हैं।

Uber files leak : क्या है उबर फाइल्स?

ब्रिटेन के अखबार ‘द गार्डियन’ के हाथ ये कंपनी के कुछ दस्तावेज़ लगे हैं। उबर फाइल्स (Uber files leak) एक 182GB का डाटा लीक है। अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया ये डेटा पांच साल 2013 से 2017 के बीच का है और इसमें कंपनी के आंतरिक ईमेल, मेमो, व्हाट्सऐप चैट और प्रजेंटेशन आदि से संबंधित 1.24 लाख रिकॉर्ड हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि कैसे उबर ने अपना कारोबार बढ़ाने के लिए अनैतिक साधनों का इस्तेमाल किया और कानूनों को चकमा दिया।

Uber files leak : द गार्डियन बताया कि उबर ने श्रम और टैक्सी कानूनों में ढील पाने के लिए राजनीतिक हस्तियों की लॉबिंग की। ड्राइवरों के साथ हिंसा की घटनाओं का इस्तेमाल सहानुभूति पाने के लिए किया। दस्तावेजों के जरिए आरोप लगाए गए कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन, जब देश के उपराष्ट्रपति थे, तो उनका केलेनिक से सीधा संपर्क था। इसी तरह उबर ने दुनियाभर में मीडिया संस्थानों को अपने पक्ष में खबर दिखाने के लिए प्रभावित करने की मुहिम चलाई। उबर के अधिकारी इस बात से पूरी तरह वाकिफ थे कि वे कानून तोड़ रहे हैं।

उबर ने भारत में क्या-क्या किया?

उबर फाइल्स पर मचे हंगामे के बीच (Uber files leak) भारत से संबंधित जानकारियों की बात करें तो कंपनी ने रेगुलेशन से संबंधित मुद्दों से बचने के लिए उबर ने देश में बड़े पैमाने पर लॉबिंग की। कंपनी ने नीतियों को प्रभावित करने के लिए नौकरशाहों से लेकर राजनेताओं तक को भी प्रभावित करने का प्रयास किया। कंपनी ने कई राज्यों के साथ समझौते भी किए, लेकिन ये जमीन पर नहीं उतर पाए। इसके अलावा उसका भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), आयकर विभाग और सेवा कर विभाग जैसे रेगुलेटर्स से टकराव भी हुआ।

उबर ने जांच को प्रभावित करने का किया प्रयास

उबर कंपनी ने गतल ढंग से जांच को प्रभावित करने का प्रयास भी किया। कंपनी मुख्यालय के लोग स्थानीय टीम का कनेक्शन काट देते थे, लेकिन दर्शाते थे कि वह अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं। जांच को प्रभावित करने का तरीका कुछ यूं अपनाया कि उसने “किल स्विच” नामक प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जिसमें कंपनी अपने मुख्यालय से स्थानीय सिस्टम को बंद कर देती है। इस बटन का इस्तेमाल 13 बार किया गया। कई बार तो छापे के दौरान इसका इस्तेमाल हुआ।

उबर ने विवाद पर अपने बचाव में क्या कहा

विवाद के बाद उबर इंडिया ने अपने एक बयान में कहा, “हम लंबे समय से ऐसे नियमों और रेगुलेशन का पालन करते रहे हैं। एक कैटेगरी-डिफाइनिंग कंपनी के तौर पर हम ऐसे प्रगतिशील रेगुलेशन का स्वागत और समर्थन करते हैं जो राइडर्स, ड्राइवर्स और शहरों के लिए अच्छा हो।” उबर इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने अतीत में गलतियों को स्वीकार किया है, लेकिन 2017 से CEO दारा खोस्रोवशाही की अगुवाई में यह अलग कंपनी है। हम अतीत के लिए कोई बहाना नहीं बनाना चाहते हैं। बस यही चाहते हैं कि बीते पांच वर्षों के हमारे कामकाज पर हमें आंका जाए।

Uber files leak

आपको बता दें कि दुनियाभर के करीब 72 देशों में अपनी सेवाएं देने वाली उबर कंपनी का कारोबार फिलहाल 44 अरब डॉलर का है और भारत में कंपनी के साथ छह लाख से अधिक ड्राइवर और पार्टनर जुड़े हुए हैं। 2013 में शुरूआत करने वाली

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