शिवपुरी: खुले में शौच पर दलित बच्चों की पीट-पीट कर हत्या, इंसानियत शर्मसार

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मध्य प्रदेश के शिवपुरी ज़िले के भावखेड़ी गांव में पंचायत भवन के पास शौच करने पर दो दलित बच्चों की पीट-पीट हत्या कर दी गई.

ग्राउंड रिपोर्ट । मध्यप्रदेश

पिछले कुछ समय से दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाने वाला देश अब भीड़तंत्र में परिवर्तित सा होता जा रहा है. रोज़ाना भीड़ के हाथों पीट-पीट कर मारे जाने की घटनाएं जैसे अब आम हो गई हैं. भीड़ द्वारा कथित तौर पर पीट-पीट हत्या करने वाले अधिकतर मामले विशेष कर धार्मिक पहचान के चलते हुए हैं.

फ़ोटो- सोशल मीडिया

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार सिरसौद पुलिस थाने के प्रभारी निरीक्षक ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि दोनों बच्चों रोशनी (12) और अविनाश (10), मार के बाद गंभीर रूप से घायल थे, उन्हें तुरंत अस्पताल रिफ़र किया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया. मामले के आरोपी हाकिम यादव और रामेश्वर यादव भावखेड़ी गांव के ही निवासी हैं. पुलिस ने दोनों को हिरास्त में ले लिया है. घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई है. पुलिस ने स्थिति को देखते हुए बड़ी तादाद में पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती कर दी है.

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फ़ोटो- सोशल मीडिया

क्या दलित होने के चलते की गई बच्चों की हत्या ?

रिपोर्ट में बताया गया है कि दोनों बच्चों पर हमला करने से पहले आरोपियों ने मोबाइल फोन से उन बच्चों की तस्वीरें भी खीचीं थी. एक आरोपी ने पुलिस को बताया कि उसने दोनों बच्चों को महज़ इसलिए पीट-पीट कर मार डाला क्योंकि ईश्वर ने उसे दुष्टों को मारने का आदेश दिया था. हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में शिवपुरी एसपी ने कहा, ‘आईपीसी की धारा 302 और एससी/एसटी एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है. दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

वहीं दूसरी तरफ़ मृतक बच्चों के परिजनों का आरोप है कि परिवार से रंजिश की वजह से हाकिम यादव और रामेश्वर यादव ने उनके बच्चों को मार डाला. मृतक अविनाश के पिता का कहना है कि मां की मौत के बाद उसने बहन रोशनी को बेटी की तरह पाला था. मृतक अविनाश और रोशनी बुआ-भतीजे थे. मनोज का आरोप है कि उनके घर में शौचालय नही बनने दिया गया. शौचालय नहीं होने की वजह से परिवार के लोगों को मजबूरन बाहर जाकर शौच करना पड़ता था.

मनोज द्वारा लगाए गए आरोप

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वहीं मनोज का यह भी आरोप है कि उनके घर पर शौचालय बनने के लिये पंचायत के पास पैसा भी आ गया था लेकिन “इन लोगों ने उसे बनने नहीं दिया.” उनका यह भी दावा है कि इन लोगों की वजह से गांव में उनके परिवार के साथ बदसलूकी और मारपीट की जाती थी. मनोज के पास कोई ज़मीन नही है और उनका पूरा परिवार मज़दूरी करके ही गुज़र-बसर करता था. मनोज का परिवार गांव के बेहद गरीब परिवारों में से एक है. कमज़ोर आर्थिक स्थिति के चलते मनोज घर में शौचालय का निर्माण नहीं करा सके.

फ़ोटो- सोशल मीडिया

ODF घोषित गांव में खुले में शौच क्यों?

मध्यप्रदेश के शिवपुरी को पूरी तरह ODF यानी ओपन डेफिकेशन फ्री घोषित किया जा चुका था। फिर यहां बच्चे खुले में शौच करने को क्यों मजबूर थे। यह एक बड़ा सवाल है। क्या स्वछता के नाम पर अपनी छवि चमकाने मात्र के लिए गांवों को कागज़ों में ODF घोषित किया जा रहा है? क्या सरकार द्वारा किये जा रहे स्वछता के दावे खोखले हैं?

मायावती ने ट्वीट कर भाजपा और कांग्रेस पर किया हमला

मायावती ने बुधवार को ट्वीट कर कहा, ‘देश के करोड़ों दलितों, पिछड़ों और धार्मिक अल्पसंख्यकों को सरकारी सुविधाओं से वंचित रखने के साथ-साथ उन्हें हर प्रकार की जुल्म-ज्यादतियों का शिकार भी बनाया जाता रहा है. ऐसे में मध्य प्रदेश के शिवपुरी में दो दलित बच्चों की नृशंस हत्या अति-दुखद व अति-निंदनीय है.’ मायावती ने इस मामले में दोषियों को सख़्त सज़ा दिलाने की मांग करते हुए कहा, ‘यह सच बहुत ही कड़वा है तो फिर खुले में शौच को मजबूर दलित बच्चों की पीट-पीट कर हत्या करने वालों को फांसी की सजा अवश्य दिलायी जानी चाहिए.’

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मामले के तूल पकड़ते ही एमपी के सीएम कमलनाथ ने भी इस घटना की निंदा की है और अभियुक्तों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर परिवार की सुरक्षा और उन्हें हर संभव मदद के लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं.

देश में लगातार भीड़ द्वारा कथित तौर पर पीट-पीट कर हत्या करने के मामले रोज़ाना सामने आ रहे हैं. अधिकतर मामलों में हत्या की वजह धार्मिक पहचान का होना पाया गया है. क्या ये समझा जाए कि भाजपा के सत्ता में आने के बाद से कट्टरपंती विचारधारा के लोगों को क़ानून हाथ में लेने की पूरी छूट मिल गई है या फिर उनकों क़ानून का डर नहीं रहा.