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कल राम मंदिर भूमिपूजन हुआ, आज ट्विटर ट्रेंड मंदिर नहीं रोजगार चाहिए

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Ground Report | News Desk | राम मंदिर भूमि पूजन के अगले दिन ट्विटर पर #मंदिर_नही_रोजगार_चाहिए का ट्रेंड चल रहा है। कल, यानि 5 अगस्त को अयोध्या में प्रधानमंत्री मोदी ने राम मंदिर की आधारशिला रखी। इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद थे। इसके अलावा राष्ट्रस्वयं सेवक के प्रमुख मोहन भागवत भी मंच पर मौजूद थे।

गौरतलब बात है कि जहाँ पूरा देश कोरोना वायरस से ग्रसित हैं। देश की सरकार को उस बीच मंदिर का निर्माण महत्वपूर्ण लगा। देश के सरकारी अस्पतालों की हालत खस्ता होने के कारण ही देश के किसी भी कोविड पॉजिटिव नेता ने अपने इलाज का रुख सरकारी अस्पताल की ओर नहीं किया। देश की स्वास्थ्य सेवा अपने निचले स्तर से गुजर रही है। देश में खस्ता स्वास्थ्य व्यवस्था और शिक्षा का स्तर देखते हुए ट्विटर चलाने वाले लोगों ने ये ट्रेंड शुरू किया। अभी हमारा देश कोरोना जैसी घातक बीमारी को काबू में लाने में असफल रहा है। इसी बीच समाज सेवक हंसराज मीणा लिखते है।

भूमिपूजन के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि “राम मंदिर हमारी संस्कृति का आधुनिक प्रतीक बनेगा। हमें आपसी प्रेम- भाईचारे के सन्देश से राम मंदिर की शिलाओं को जोड़ना है। जब-जब राम को माना है विकास हुआ है, जब भी भटके हैं विनाश हुआ है। सभी की भावनाओं का ध्यान रखना है, सबके साथ से और विश्वास से ही सबका विकास करना है। कोरोना के कारण जैसे हालात हैं, राम के द्वारा दिया गया मर्यादा का रास्ता जरुरी है।”

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राम मंदिर नहीं, देश को स्वास्थ्य और शिक्षा की अधिक ज़रूरत

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन– (WHO) के अनुसार, भारत में 1,000 लोगों के इलाज के लिए एक डॉक्टर उपलब्ध है, और 11,500 से अधिक लोगों के लिए एक सरकारी डॉक्टर मौजूद है। इसके अलावा, शहरी और ग्रामीण इलाकों की स्वास्थ्य सेवाओं में भारी अंतर है।

वहीं अगर शिक्षा की बात की जाएं तो हाल ही में नई शिक्षा नीति का ऐलान तो कर दिया है। लेकिन इस को लागू करने के बाद , क्या देश के हर बच्चे तक शिक्षा पहुँच पाएंगी? ऑनलाइन शिक्षा के कारण कई विद्यार्थी अपनी क्लास नहीं ले पा रहे है। जिसका कारण देश के कई स्थानों पर इंटरनेट का ना होना है। शिक्षा के क्षेत्र में सामाजिक असमानता झेल रहे विद्यार्थियों को अब डिजिटल डिवाइड से भी जूझना पड़ेगा।

नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार, भारत में केवल 23.8 फीसदी घरों में ही इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध है। शहरी इलाकों में इंटरनेट की सुविधा 42 फीसदी है, जबकि ग्रामीण इलाकों में 14.9 फीसदी है। केवल आठ फीसदी घरों में ही इंटरनेट और कम्प्यूटर दोनों की ही सुविधाएं उपलब्ध हैं। पूरे देश में 78 फीसदी लोगों के पास मोबाइल की सुविधा है, लेकिन इसमें भी ग्रामीण इलाके शहरी इलाकों की तुलना में पीछे है।

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इसके अलावा राममंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम में आरआरएस प्रमुख मोहन भागवत ने पूर्व भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी को याद किया। उन्होंने कहा कि “कई लोग महामारी के कारण नहीं आ पाए। लालकृष्ण आडवाणी भी नहीं आ पाए। देश को आत्मनिर्भर बनाने की और काम जारी है। आज महामारी के बाद पूरा विश्व नए रास्तों को ढूंढ रहा है।”

Written By Kirti Rawat, She is Journalism Graduate from Indian Institute of Mass Communication, New Delhi.

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