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ट्रक ड्राइवरों से हर साल 48 हज़ार करोड़ की रिश्वत लेती है पुलिस : रिपोर्ट

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देश में ट्रक ड्राइवर और उनके मालिक रोजाना घूस के तौर पर सालाना 48 हजार करोड़ रुपये चुकाते है। अंग्रेजी के बिजनेस अखबार इकनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक, यह घूस यातायात या राजमार्ग पुलिस को दी जाती है। अखबार में एनजीओ सेवलाइफ फाउंडेशन के अध्ययन में कहा गया है कि ट्रक ड्राइवरों को हर साल 48000 करोड़ रुपये (रोजाना 132 करोड़ रुपये) बतौर घूस चुकानी पड़ती है। देश की सड़कों पर रिश्वत का खेल खुलेआम चल रहा है। यह ‘खेल’ इतना बड़ा है कि इसने कई उद्योगों से होने वाली कमाई को भी पीछे छोड़ रखा है।

यह अधय्यन 10 प्रमुख परिवहन और ट्रांसपोर्ट केंद्रों में किया गया था। 82 फीसदी से अधिक डाइवरों और ट्रक मालिकों का कहना है कि रोड पर चलते समय उन्हें एक या दो विभागों के अधिकारियों को रिश्वत देनी पड़ती है। यहां तक कि पूजा समितियों जैसे स्थानीय समूह भी घूस लेकर उनके ट्रक निकलने देते हैं। इस तरह से हर चक्कर में ट्रक डाइवरों को औसत 1257 रुपये चुकाने होते हैं। अध्ययन के मुताबिक हर साल ट्रक वाले ट्रैफिक पुलिस या परिवहन से जुड़े अन्य अधिकारियों को इतनी मोटी रकम रिश्वत के तौर पर दे देते हैं। यहां तक कि जागरण कराने वाली पूजा समिति जैसे छोटे-छोटे समूह भी इन्हें नहीं बख्शते। ये स्थानीय समूह ट्रक वालों को धमकाकर पैसा वसूलते हैं और पैसा नहीं देने पर रास्त नहीं देते हैं। 

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सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारी कहते हैं, राष्ट्रीय राजमार्गों पर घूसखोरी को लेकर कोई अध्ययन नहीं किया गया है, लेकिन वित्त वर्ष 2006-07 में ट्रांसपेरेंसी नाम की एजेंसी ने पहली बार व्यवसायिक वाहनों के चालकों से बातचीत के विश्लेषण के बाद अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया था कि भारत में सड़कों पर सालाना 22 हजार करोड़ रुपए घूस वसूली जाती है। मौजूदा समय में यह आंकड़ा बढ़कर 48 हजार करोड़ रुपए हो गया है।

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