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लक्षद्वीप के आदिवासी खतरे में क्यों? #save_lakshadweep कैंपेन का कारण क्या है?

tribles in lakshadweep
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Tribal in Lakshadweep: आजकल पूरे सोशल मीडिया पर #save_lakshadweep  की मुहिम देखने को मिल रही है। लक्षद्वीप में आदिवासी ( Tribal in Lakshadweep) लोग अपने द्वीप को बचाने के लिए आंदोलन पर बैठ गए है। दरअसल उनके मन में अपने द्वीप को खो देने का डर पैदा हो गया है। इसका कारण नए प्रशासन अधिकारी के लाए गए कानून हैं।

कौन है नए प्रशासनिक अधिकारी?
गुजरात के पूर्व गृह मंत्री प्रफुल्ल पटेल को पहले दादरा और नगर हवेली का प्रशासक नियुक्त किया गया था। 2020 दिसंबर में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी दिनेश शर्मा का फेफड़ों की बीमारी की वजह से निधन के होने के बाद प्रफुल्ल खेड़ा पटेल ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ मिलकर नए प्रशासन के रूप में लक्षद्वीप का कार्यभार संभालने की जिम्मेदारी ली।

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कैसे खतरे में है आदिवासियों की संस्कृति

लक्षद्वीप एक मुस्लिम बहुल द्वीप है उनकी परंपरा और संस्कृति उनके लिए बहुत मायने रखती है। आदिवासियों ने कहा कि पटेल ने मुस्लिम द्वीप में शराब खुले आम बेचने का आदेश दे दिया है और पशु संरक्षण के नाम पर बीफ (गोमांस) और उससे बनने वाली सामग्री पर रोक लगा दी है। इनका असली मकसद हमारी परंपराओं और सांस्कृतिक जीवन को नष्ट करना है।

#save_lakshadweep मुहिम शुरू करने का कारण

लक्षद्वीप में रहने वाले लोग द्वीप की सुरक्षा करते हैं। लक्षद्वीप में बाहरी लोगों को जमीन खरीदने की अनुमति भी नहीं है लेकिन आदिवासियों का कहना है कि नए प्रशासन अधिकारी सड़कों को चौड़ा कर रहे है जिसके लिए उन्होंने हमारे घर तोड़ने का आदेश दे दिया है। यह सभी घर हमारी पुरानी संस्कृति की याद दिलाते हैं। यह जानते हुए भी की यहां ज्यादा वाहन नहीं चलते हैं। आदिवासियों ने यह भी कहा कि तटीय इलाकों में मछुआरों की झोपडे तक तोड़ दिए गए।

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लक्षद्वीप के अध्यक्ष बुन्यामिन ने बताया कि द्वीपों में पहले से ही जगह की कमी है। कई परिवारों के पास सिर्फ एक घर है। अगर वो उसे भी खो देंगे तो क्या होगा? कुछ द्वीप सिर्फ 500 मीटर चौड़े हैं, अगर वो जमीन को चौड़ा करते हैं तो लोगों को समुद्र के किनारे रहना पड़ेगा।

किन कानूनों की वजह से छिड़ा है आंदोलन

प्रशासनिक अधिकारी प्रफुल्ल पटेल ने शराब को बेचने की मंजूरी दे दी है। पशु संरक्षण कानून लागू किया जिसमें बीफ ( गाय, बैल ) से बनी सभी चीजों पर रोक लगा दी है। मिस डे मील में भी नानवेज खाने पर रोक लगा दी गई है। सड़के चौड़ी करने के लिए लोगों से उनकी ज़मीन ली जा रही है। इन्हीं सब आरोपों और प्रफुल्ल पटेल के नए फैसलों के कारण लक्षद्वीप में आदिवासियों और नेताओं ने प्रफुल्ल पटेल को वापस बुलाने की मांग करी जा रही है।

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इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता हंसराज मीणा ने ट्वीट करते हुए कहा कि, लक्ष्यद्वीप में 99% मुस्लिम, आदिवासी आबादी को गुलाम बनाने, आजीविका व संस्कृति को खत्म करने और प्राकृतिक सौंदर्य को तबाह करने वाला तुगलकी फरमान जारी हुआ है। मैं इस साज़िश का कड़ा विरोध दर्ज करता हूँ। लक्ष्यद्वीप एडमिनिस्ट्रेटर प्रफुल्ल पटेल को तत्काल हटाया जाए। #LetLiveLakshadweep

वहीं इस मामले में सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए ट्राइबल आर्मी ने विरोध जताते हुए पोस्टर ट्वीट किया और लक्षद्वीप की सभ्यता और संस्कृति बचाने की अपील की।

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