प्रधानमंत्री की रैली के लिए काटे गए पेड़, पर्यावरण मंत्री बोले इसमें नया क्या है?

prakash javdekar on trees cutting for pm rally in parshuram college
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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

सूट बूट पहनकर वैश्विक मंचों से जब वेश्विक नेता “पर्यावरण” शब्द अपनी ज़ुबान से निकालते हैं तो तालियों की गड़गड़ाहट से मंच गूंज उठता है। मानों पर्यावरण की समस्या का हल निकालने देवता ज़मीन पर उतर आए हों। लेकिन वहां बैठी जनता को भी नहीं पता होता कि जो पर्यावरण-पर्यावरण चिल्ला रहा है, वह जब ज़मीन पर होता है तो उसके लिए पर्यावरण केवल एक ऐसी फाईल का नाम है जिसे पर्यावरण मंत्री को फोन कर क्लीयर करवाना होता है। पर्यावरण केवल विकास की राह में आने वाले रोड़े का नाम है, जिसे पर्यावरण मंत्री साफ कर देता है। खैर हमारे पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर बड़ी सहजता से इस बात को स्वीकार कर लेते हैं। मामला है महाराष्ट्र के पुणे शहर में परशुराम कॉलेज के कैंपस में प्रधानमंत्री की रैली के लिए कुछ पेड़ों के काटे जाने का। इस पर विपक्ष ने हंगामा कर दिया की केवल रैली मात्र के लिए पेड़ों की बली क्यों देना। इसपर पर्यावरण मंत्री ने बड़ी सहजता से कहा कि देखिये यह कोई आम रैली नहीं है प्रधानमंत्री की रैली है, दूसरी बात यह कोई नई बात नहीं है। पहले भी कई विपक्षी नेताओं के लिए पेड़ काटे गए हैं। और जितने पेड़ हम काटते हैं उससे दोगुने पेड़ लगा देते हैं। यह जंगल विभाग का नियम है। उन्होने यह भी कहा कि हंगामा अभी ही क्यों बरपा पहले क्या लोग जागरुक नहीं थे, जब पूर्व प्रधानमंत्रियों की रैलियों के लिए पेड़ काटे जाते थे।

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सही बात है पर्यावरण के लिए लोगों में चिंता मोदी सरकार के समय ही क्यों बढ़ी है। सवाल अच्छा है, खैर एक और सवाल पर्यावरण मंत्री के सामने दागा गया, महाराष्ट्र में किसान आत्महत्या का इस पर पर्यावरण मंत्री ने एक कुशल नेता की तरह जवाब दिया और कहा कि यह समस्या हमें पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार से मिली है विरासत में। महाराष्ट्र के केवल पांच जिलों में किसान आत्महत्या कर रहे हैं, जहां अभी तक सिचाई के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। केवल शब्द पर ध्यान ज़रुर दीजिएगा…