भारत में होने वाली मौतों के सबसे बड़े कारणों में कहां आता है कोरोना वायरस?

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नई दिल्ली। पिछले 1 साल में कोरोनावायरस महामारी के कारण पूरे देश में चिंता का माहौल है। लोग भयभीत हैं, अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है पर यदि कुछ कदम पीछे लेकर विस्तृत में देखा जाए तो क्या ये नया वायरस वाकई भारत मे होने वाली मौतों का मुख्य कारण है? हर साल भारत मे प्रति 1000 लोगों में से 7 से 8 लोगों की मौत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिजीज रिपोर्ट को देखें तो हम पाएंगे कि यह वायरस बीमारियों से होने वाली मौतों के 10 सबसे बड़े कारणों में भी नहीं आता।

भारत में 10 सबसे बड़े मौत के कारण

स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार महामारी के शुरू होने से लेकर अब तक पिछले एक साल में कुल 1.66 लाख लोगों की मौत कोरोनावायरस इनफेक्शन के कारण हो चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन कर अध्य्यन बताते हैं कि भारत में होना होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण नॉन कम्युनिकेबल डिसीस जैसे कि दिल संबंधित रोग, फेफड़े संबंधित रोग, कैंसर और स्ट्रोक आदि ही हैं।

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भारत में लगभग 15.4 लाख लोग हर साल दिल से संबंधित रोगों के कारण मारे जाते हैं। इसी प्रकार दूसरे स्थान पर सबसे बड़ा मौत का कारण (COPD) क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पलमनरी डिजीज यानी कि फेफड़े संबंधित रोग है। इन रोगों से लगभग 9.6 लाख लोगों की मृत्यु होती है जिसके बाद आता है कैंसर! यह भारत में होने वाली मौतों का तीसरा सबसे बड़ा कारण है जिसके कारण 7.8 लाख लोग मौत के घाट उतारते हैं। उस से भी बड़ी विडंनबना यह है कि आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने को है पर लगभग 7.38 लाख लोगों की मौत डायरिया यानी कि दस्त संबंधित रोगों से हर साल होती है।

टीबी (तपेदिक) रोग जो लगभग हर आधुनिक देश से समाप्त हो चुका है अब भी 4.5 लाख भारतीयों के जीवन को लील जाता है। टीबी के मामलों में हम दुनिया मे सबसे आगे हैं। लगभग दुनिया का हर तीसरे टीबी का रोगी भारत में पाया जाता है। कुछ देश जहां ये रोग अब भी पाया जाता है वो है भारत (27%), चीन (9%), इंडोनेशिया (8%), फिलीपींस (6%) और बांग्लादेश (4%)। अन्य बीमारियों के मामलों में 4.3 लाख भारतीय जन्म सम्बन्धित रोगों और 2.5-2.5 लाख लोग डायबिटीज और अस्थमा से भी मारे जाते हैं। यदि प्रतिदिन के हिसाब से आंकड़े देखे जाएं तो लगभग 2000 लोग रोज डायरिया और 1200 लोग रोज ट्यूबरक्लोसिस से मरते हैं। ये दोनों ही रोज़ कोरोना से मरने वाले लोगों से कहीं अधिक है।

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यह तो रही रोगों से होने वाली मौतों की बात पर इसके अलावा सड़क पर दुर्घटनाओं से मरने के आंकड़े भी भारत में काफी चिंताजनक है। ऐसा माना जाता है कि लगभग 500 लोग रोज एक्सीडेंट्स में मारे जाते हैं।

इसीलिए यदि बड़े परिपेक्ष में देखा जाए तो हमें कोरोनावायरस से घबराने की नहीं बल्कि उसके कारणों को और उससे निपटने के उपायों को ध्यान में रखकर सतर्क जीवन जीने की जरूरत है। लगभग एक दशक पहले जब
स्वाइन फ्लू की शुरुआत हुई थी तब भी काफी डर का माहौल था। अभी भी स्वाइन फ्लू हर साल लगभग 1000 लोगों की मौत का कारण बनता है। वायरस बदलता रहेगा पर यह याद रखना निहित है कि मानव जाति ने इस से कहीं बड़ी चुनौतियों को जीता है।

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