Home » HOME » टूलकिट मामला: कौन है दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में ली गई दिशा रवि

टूलकिट मामला: कौन है दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में ली गई दिशा रवि

toolkit
Sharing is Important

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने किसान आंदोलन से संबंधित स्वीडिश जलवायु कार्यकर्ता की टूलकिट के जरिये देश बदनाम करने की साजिश में शामिल 21 वर्षीय जलवायु कार्यकर्ता दिशा रवि को बंगलूरू से गिरफ्तार कर पांच दिन की हिरासत में लिया है। साइबर सेल ने टूलकिट मामले में शनिवार को यह पहली गिरफ्तारी की है।

पुलिस ने कहा कि इस मामले में शांतनु और निकिता को और गिरफ्तार किया जाना है। आरोप है कि दिशा रवि ने किसानों से जुड़ी टूलकिट को एडिट किया उसमें कुछ चीज़ें जोड़ी और उसके आगे भेजा था।

मोदी सरकार के 5 बड़े घोटाले, जिनके सबूत मिटाने पर जुटी है सरकार

देश में ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर’ अभियान के फाउंडर सदस्यों में दिशा रवि भी शामिल हैं। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने टूलकिट मामले में 4 फरवरी को देश के खिलाफ साजिश रखने, हिंसा के लिए भड़काने और नफरत फैलाने के मामले में पहला मामला दर्ज किया था। टूलकिट मामले में हुई यह पहली गिरफ्तारी है।

READ:  दिल्ली से छत्तीसगढ़ जा रही दुर्ग एक्सप्रेस की 4 बोगियों में लगी आग, देखें वीडियो

आरोपी की पेशी के दौरान पुलिस ने अदालत में कहा कि दिशा समेत कई आरोपियों ने  एक साजिश के तहत खलिस्तानी ग्रुप को दोबारा खड़ा करने और भारत सरकार को बदनाम करने की एक बड़ी साजिश रची है।ये खलिस्तानी आतंकी गुरुपतवंत सिंह पन्नू प्रभावित हैं।

क्या है मामला

जलवायु कार्यकर्ता ने किसानों के समर्थन में एक ट्वीट किया था, जिसमें एक टूलकिट भी थी। इस टूलकिट में किसान आंदोलन को लेकर मोदी सरकार को घेरने और भारत को बदनाम करने की साजिश रची गई थी। हालांकि, बाद में उन्होंने टूलकिट वाले ट्वीट को डिलीट कर दिया और फिर एक अन्य टूलकिट जारी किया। इसका खुलासा होने के बाद इसे लेकर बवाल मच गया।

कौन है दिशा रवि

जानकारी के मुताबिक, जलवायु कार्यकर्ता दिशा ने माउंट कैर्मेल कॉलेज से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन स्नातक की डिग्री हासिल की है। दिशा इस समय गुड माइल्क कंपनी के साथ जुड़ी हुई हैं। सूत्रों ने बताया कि दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जब उन्हें गिरफ्तार किया गया, उस वक्त वह घर से ही काम कर रही थीं। दिशा रवि के पिता मैसूरु में एक एथलेटिक्स कोच हैं, जबकि उनकी मां एक गृहिणी हैं।

READ:  अभिव्यक्ति की आज़ादी पर मंड़राते ख़तरे को पहचानना ज़रूरी…!

आप ग्राउंड रिपोर्ट के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@gmail.com पर मेल कर सकते हैं।