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Tobacco और Smoking में भारत का नया रिकॉर्ड, टॉप 10 देशों में हुआ शामिल

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Tobacco and Smoking: मौत के लिए जिम्मेदार और खतरनाक कारणों में एक तम्बाकू और धूम्रपान भी शामिल है। 31 मई को विश्व तम्बाकू दिवस मनाया (World Tobacco Day) जाता है। Tabaco and Smoking: कुछ ही दिन पहले वैज्ञानिकों ने सबसे ज्यादा धूम्रपान और तम्बाकू का उपयोग करने वाले 10 देशों के नाम बताए हैं जिनमें भारत का भी नाम शामिल है।

कौन से हैं सबसे ज्यादा धूम्रपान करने वाले देश

10 सबसे ज्यादा धूम्रपान करने वाले देश में चीन, भारत, इंडोनेशिया, अमेरिका, रूस, बांग्लादेश, जापान, तुर्की, वियतनाम और फिलीपींस हैं।

चीन का हर तीसरा आदमी करता है धूम्रपान

दुनिया में सबसे ज्यादा चीन में धूम्रपान करने वाले लोग पाए जाते हैं। चीन में हर तीसरा आदमी धूम्रपान करता है। रिसर्च करने वाले लेखकों ने कहा है कि सभी देशों को अपने देश के युवाओं के धूम्रपान को कम करने पर ध्यान देने की जरूरत है।

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89% धूम्रपान करने वालों को 25 साल की उम्र तक लत लग जाती है। उस उम्र के बाद उनकी पहली बार धूम्रपान करने की संभावना कम होती है। सभी देशों में से आधे में 15 से 24 साल की उम्र के लोग सबसे ज्यादा धूम्रपान ओर तम्बाकू का उपयोग करते हैं।

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धूम्रपान करने से 10 साल कम होती है उम्र

रिसर्च से पता चला है कि लंबे समय तक धूम्रपान करने वालों में से कम से कम आधे लोग सीधे धूम्रपान संबंधित बीमारियों से मर जाते हैं। धूम्रपान करने वालों को औसत उम्र कभी न धूम्रपान करने वाले लोगों की तुलना में 10 साल कम हो जाती है।

क्या कहती है Global survey की रिपोर्ट

1990 से 2019 के बीच एक गया जिसमें तम्बाकू का उपयोग करने वाले देशों की लिस्ट मेडिकल जनरल द लैसेंट नामक एक वेबसाइट पर पब्लिश हुई। रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार सबसे ज्यादा धूम्रपान और तम्बाकू का प्रयोग करने वाले विश्व भर में 204 देश हैं जिसमें से 3625 global survey में इकट्ठा किया गया है।

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2019 में धूम्रपान के कारण 1.7 मिलियन मौत coronary heart disease के कारण हुई, 1.6 मिलियन की मौत chronic obstructive pulmonary disease के कारण, 1.3 मिलियन की मौत trachea, bronchial lung cancer के कारण और 1 मिलियन की strock की वजह से मौत हुई।

क्या कहना है Metrissa Reitzma का

रिसर्च करने वाले लेखकों में से metrissa reitzma का कहना है कि कम उम्र के लोग ज्यादातर नशे की चपेट में जल्दी आ जाते हैं। तम्बाकू आने वाले वर्षो में एक महामारी की तरह बनी रहेगी, जब तक हर साल इसे कम करने की कोशश नहीं करी जाएगी।

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एक्सपर्ट का क्या कहना है

एक्सपर्ट के मुताबिक, कमजोर राजनीति और लगातार तम्बाकू इंडस्ट्री में हो रही प्रोग्रेस, जिससे तम्बाकू के खिलाफ जागरूकता और कार्रवाई के बीच एक बड़ा अंतर आ गया है। रिसर्चर ने निष्कर्ष निकाला कि direct और indirect forms जो promotion दिखाते हैं उनपर बैन लगाना होगा।

पिछले तीन दशकों में फिर भी वैश्विक स्तर पर धूम्रपान में कमी आई है। लेकिन यह 20 देशों में पुरुषों में और 12 देशों में महिलाओं में बढ़ गया है।

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