ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका समेत कई अन्य देशों की मीडिया ने #CAA को मानवता के खिलाफ़ बताया

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ग्राउंड रिपोर्ट । नेहाल रिज़वी

भारत में धर्म के आधार पर नागरिकता देने वाले नागरिकता क़ानून CAA के ख़िलाफ़ विरोध की आग पूरे भारत के बाद अब विश्व भर के दूसरे देशों में भी फैलना शुरू हो गई है। जामियां यूनिवर्सिटीज़ में पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए बर्बर हमले के बाद दुनियां के अलग-अलग देशों की यूनीवर्सिटीज़ के छात्रों ने जामियां के समर्थन में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारत के मूल निवासियों ने स्थानीय समय के अनुसार शुक्रवार 20 दिसम्बर को इस काले क़ानून के ख़िलाफ़ एक विशाल धरना प्रदर्शन की काल दी है।

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कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के कुछ बुद्धिजीवियों ने एनआरसी मसौदे खिलाफ आवाज उठाई है। उनकी इस ऑनलाइन पीटिशन की मुहिम को दुनियाभर के नामी-गिरामी विश्वविद्यालयों के प्रोफेसर, लेखकों और फिल्ममेकर्स का समर्थन मिल रहा है। उनका कहना है कि इन 40 लाख ‘अवैध’ लोगों में से अधिकांश अशिक्षित, गरीब और लाचार हैं और वे एनआरसी पीड़ितों के साथ एकजुटता से खड़े हुए हैं।

दुनिया भर के बड़े अख़बारों ने ‘कैब’ पर लिखना शुरू कर दिया है

ग़ौरतलब है कि नागरिकता संशोधन क़ानून और भारत में एनआरसी लागू करने के मोदी सरकार के फ़ैसले के ख़िलाफ़ जहां पूरा भारत विरोध प्रदर्शनों की आग में जल रहा है, अब इस आग ने दुनिया के कई अन्य देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, यूएई, कनाडा और अमरीका समेत कई देशों की मीडियां नें नागरिकता का़नून CAA पर भारत सरकार के ख़िलाफ़ लिखना शुरू कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र संघ के बाद ह्यूमन राइट्स वाच ने भी इस क़ानून को मुस्लिम विरोधी और भेदभावपूर्ण क़रार देते हुए इसकी निंदा की है।

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दुनिया के बड़े प्रमुख अख़बारों ने भी नागरिक संशोधन क़ानून पर भारत पर सवाल करना शुरू कर दिया दै। सरकार अपने फ़ैसले पर अटल है। सरकार का कहना है कि लोग कितना भी विरोध कर लें मगर सरकार फैसला वापस नहीं लेने वाली है।