देश की मौजूदा आर्थिक सुस्ती बहुत बड़ी, अर्थव्यवस्था आईसीयू की तरफ बढ़ रही है : पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन का कहना है कि देश की मौजूदा आर्थिक सुस्ती बहुत बड़ी (Great Slowdown) है। ऐसा लग रहा है कि अर्थव्यवस्था आईसीयू की तरफ बढ़ रही है। ट्विन बैलेंस शीट (TBS) संकट की दूसरी लहर इकोनॉमी को प्रभावित कर रही है। सुब्रमण्यन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पेपर प्रजेंटेशन के दौरान ऐसा कहा।

  • जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ 4.5% रही, यह 6 साल में सबसे कम
  • 2014 में मुख्य आर्थिक सलाहकार रहते हुए भी एनपीए संकट पर चिंता जताई थी
  • कहा- एक्सपोर्ट, इंपोर्ट और रेवेन्यू के आंकड़े अर्थव्यवस्था की गंभीर स्थिति बता रहे
  • यह भारत की बड़ी मंदी है जहां अर्थव्यवस्था आईसीयू में जा रही है

सुब्रमण्यन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के ड्राफ्ट वर्किंग पेपर में कहा-

‘साफ तौर पर यह कोई सामान्य मंदी नहीं है । यह भारत की बड़ी मंदी है जहां अर्थव्यवस्था आईसीयू में जा रही है।’

नरेंद्र मोदी सरकार में मुख्य आर्थिक सलाहकार रहते हुए सुब्रमण्यन ने दिसंबर 2014 में दोहरे बैलंस शीट की समस्या उठाई थी, जिसमें निजी उद्योगपतियों द्वारा लिए गए कर्ज बैंकों के गैर-निष्पादित संपत्ति (NPA) बन रहे थे।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के भारतीय कार्यालय के पूर्व प्रमुख जोश फेमैन के साथ मिलकर लिखे गए अपने नए पेपर में सुब्रमण्यन ने पहले और दूसरे दोहरे बैलेंस शीट में अंतर को बताया है। सुब्रमण्यन फिलहाल हॉवर्ड केनेडी स्कूल में पढ़ाते हैं।

तीन साल में खाने-पीने की चीजों में सबसे ज्यादा 5.54% बढ़ गई महंगाई

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने नए रिसर्च पेपर में 2004 से 2011 तक स्टील, पावर और इन्फ्रा सेक्टर के कर्ज जो कि एनपीए में बदल गए उन्हें टीबीएस-1 कहा। टीबीएस-2 से उनका आशय प्रमुख रूप से नोटबंदी के बाद नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों और रिएल एस्टेट फर्मों के नकदी संकट से है।

विरोध कर रहे जामिया के छात्रों पर दिल्ली पुलिस ने बर्बर तरीके से किया लाठीचार्ज

सुब्रमण्यन के मुताबिक पिछले साल सितंबर में सामने आया आईएलएंडएफएस ( IL&FS) का संकट भूकंप जैसी घटना थी। सिर्फ इसलिए नहीं कि आईएलएंडएफएस पर 90,000 करोड़ रुपए के कर्ज का खुलासा हुआ, बल्कि इसलिए भी क्योंकि इससे बाजार प्रभावित हुआ और पूरे एनबीएफसी सेक्टर को लेकर सवाल खड़े हो गए।

सुब्रमण्यन ने कहा-

‘नोटबंदी के बाद, बैंकों में बड़ी संख्या में नोट पहुंचे जिसका बड़ा हिस्सा कर्ज के रूप में एनबीएफसी के पास गए। इन पैसों को एनबीएफसी ने रियल एस्टेट सेक्टर को दिया। 2017-18 तक, एनबीएफसी लगभग 5,00,000 करोड़ रुपये के बकाया अचल संपत्ति ऋण के लगभग आधे के लिए जिम्मेदार थे।’

उन्होंने कहा, ‘मौजूदा मंदी सिर्फ इसलिए चिंता पैदा करने वाली नहीं है कि 2019-20 की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 4.5 फीसदी रही। इससे ज्यादा चिंता वाली बात यह है कि इसके आंकड़े अलग-अलग हैं।’