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सेना द्वारा ‘फ़र्ज़ी एनकाउंटर’ में मारे गए तीन युवकों के शव क़ब्र से निकालकर परिवार को सौंपे गए..

shopian fake encounter
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जम्मू कश्मीर के शोपियां ज़िले में सेना द्वारा कथित तौर फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मारे गए राजौरी के तीन लड़कों को लेकर शनिवार को सेना के अधिकारियों ने जानकारी देते हुए बताया कि सभी लड़कों के शवों को उनकी क़ब्रों से निकाल कर परिवार वालों को सौंप दिया गया ।

सेना की 62वीं राष्ट्रीय सेना राइफल्स द्वारा फ़र्ज़ी एनकाउंटर में मारे गए इबरार अहमद (25), इम्तियाज अहमद (22) और मुहम्मद अबरार (16) थे और ये सभी राजौरी के निवासी थे। उत्तर कश्मीर में एक अज्ञात स्थान पर शुक्रवार देर रात शवों को निकालने का काम किया गया। डीएनए टेस्ट की मदद से इन लड़कों की जानकारी जुटाकर परिवार को सौंपा गया।

अधिकारियों ने कहा, ‘तीनों लोगों के शव कब्रों से निकाले गए और फिर उन्हें परिवारों को सौंप दिया गया।’ अधिकारियों के अनुसार, तीनों के परिवारवाले उनके शवों को अपने पैतृक गांव ले जाकर उन्हें दफनाएंगे। उन्होंने कहा कि तीनों के परिवारों को जम्मू क्षेत्र के राजौरी जिले से बुलाया गया था और उस स्थान पर ले जाया गया, जहां तीनों को दफन किया गया था।

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द वायर  की रिपोर्ट के अनुसार, जहां इन तानों लड़को को दफनाया गया था, वहां पर ज्ञात और अज्ञात 200 से अधिक आतंकियों के शव दफन किए गए हैं। श्रीनगर मुजफ्फराबाद रोड पर स्थित गांव से शव निकाले जाने के दौरान पुलिस, सेना और अर्धसैनिक सीआरपीएफ बलों की भारी मौजूदगी थी।

शवों को कब्र से निकाले जाने के दौरान वहां मौजूद रहे राजौरी के एक सामाजिक कार्यकर्ता चौधरी गुफ्तार ने कहा, ‘उन्होंने अपने बच्चों की पहचान 18 जुलाई को दफनाए जाने के समय दफनाने वाले के द्वारा खीची गई तस्वीरों से की थी।’

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उन्होंने कहा, ‘शवों की तस्वीरों से मैं देख सकता था कि इम्तियाज का चेहरा जला हुआ था, जिसे पहचानना मुश्किल था। अबरार के सीने को गोलियों से छलनी कर दिया गया था। इबरार का चेहरा भी आंशिक रूप से अस्त-व्यस्त था।’

शवों को दफनाने वाले अब्दुल माजिद वहां एक चाय की दुकान चलाते हैं और साल 2014 से उन्होंने 200 से अधिक शवों को दफनाया है। उन्होंने कहा, ‘यह पहली बार है कि शवों को निकाला गया है।’

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