Thakurs and Brahmins of 12 villages

ठाकुरों-ब्राह्मणों ने गैंगरेप आरोपियों की रिहाई के लिए आंदोलन चलाने का किया फैसला..

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12 गांवों के ठाकुरों-ब्राह्मणों ने गैंगरेप आरोपियों की रिहाई के लिए आंदोलन चलाने का फैसला किया है। सिर्फ इतने भर से काम नहीं चलेगा। तकाजा सिर्फ आरोपियों को बचाने का नहीं, हिंदू धर्म के शुद्धतावाद को कायम रखने का भी है। उस ईश्वरीय आदेश की रक्षा करना है जिसमें दलितों को इसी जीवन में नारकीय जीवन जीना तय हुआ था।

दलित समाज को हिंदू धर्म में बने रहने का सुख भी भोगना है और पिछले जनमों का पश्चाताप भी नहीं करना। पश्चाताप करो या बाबा साहब की बात मानो जो खुद बौद्ध हो गए और इनसे कह गए कि तुम लोग भी यह धर्म छोड़ देना।

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पीड़िता के गांव के सभी सवर्ण एकजुट हो गए हैं, इनमें ठाकुर और ब्राह्मण भी शामिल है, गांव में दलितों के गिने-चुने घर ही हैं, अब वो बिलकुल अलग-थलग हो जाएंगे

ठाकुरों-ब्राह्मणों को एक आंदोलन बागी दलितों को हिंदू धर्म से बाहर करने के लिए भी चलाना चाहिए। जैसे पाकिस्तान के सुन्नी कट्टरपंथी शियाओं को इस्लाम से बाहर करने के लिए सरकार के पीछे पड़े हैं। धर्म-धर्म चिल्लने से काम नहीं चलता, धर्म को बचाना पड़ता है। यह बहुत बड़ी जमींदारी है।

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हाथरस गैंगरेप मामले में एक ओर जहां देशभर में आक्रोश भड़का है, लोग पीड़िता के लिए न्याय मांग रहे हैं वहीं अब लोग जातिवाद के आधार पर आरोपियों के समर्थन में भी लामबंद हो रहे हैं।

शुक्रवार को बूलगढ़ी गांव के पास ही स्थित बघना गांव में ठाकुर समुदाय की पंचायत हुई जिसमें आरोपियों की रिहाई के लिए अभियान चलाने का फैसला लिया गया। इस पंचायत में बूलगढ़ी और आसपास के एक दर्जन गांव के ठाकुर और सवर्ण समाज के लोग शामिल हुए।

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ये लेख पत्रकार प्रियांशू ने लिखा है।

1 thought on “ठाकुरों-ब्राह्मणों ने गैंगरेप आरोपियों की रिहाई के लिए आंदोलन चलाने का किया फैसला..”

  1. Thik hi to hai, kaise pata chalega ki ham kewal nam ke hindu hai, isase ye sabit ho gaya ki dalito or pichharo ko kewal istmal ki chij samjhi jati hai, isase v sayad logo ka aakh khule, 16% aaj v 60%par raj karte rahna chahte hai , ye jo hamre desh ki loktantra hai o khatriye brahman or amiro ki kathputali hai, utho jago chalo or apni bebasi ka rorna mat ro, apne kismat ka phaisala khud karo, kisi ke daya patr par nirbhar nahi raho,

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