ब्राह्मणों ने पेश की मिसाल, दलित युवक को कंधे पर बिठा मंदिर के अंदर ले गए पुजारी

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

खबर सौजन्य: जनसत्ता | तेलंगाना

इस देश में जातिगत मुद्दों पर अक्सर राजीनीति होती आई है। समय-समय पर नेता भड़काऊ भाषणों से जातिगत और धार्मिक सौहार्द को बिगाड़ते नज़र आ जाते हैं, लेकिन बीते दिनों तेलांगना में जो हुआ वो जातिगत भेदभाव को खत्म करने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

दरअसल तेलंगाना में बीते सोमवार को समाजिक समानता और समरसता की एक ऐसी मिसाल पेश की गई जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। जनसत्ता डॉट कॉम में 25 फरवरी को प्रकाशित एक खबर के मुताबिक, एक पुजारी ने दलित व्यक्ति को कंधे पर उठाया और उन्हें मंदिर के अंदर ले गए।

यह वाक्या तेलंगाना के खम्मम स्थित रंगनायकुला गुट्टा का है। जहां ऐतिहासिक श्री लक्ष्मी रंगनाथ स्वामी मंदिर (रंगनायकुला गुट्टा) में समाजिक समरसता वेदिका, नरसिंह वाहिनी और अन्य संगठनों के साथ मंदिर संरक्षण आंदोलन (टीपीएम) का आयोजन किया गया।

ALSO READ:  कांग्रेस नेता फूल सिंह बरैया बोले- दलित-मुसलमान एक ही पिता की संतान, सवर्ण इनके बाद भारत आए

यह भी पढ़ें: Delhi Violence: मस्जिद पर हमला करने पहुंचे थे दंगाई, हिंदुओं ने बाल भी बांका न होने दिया

इस खास मौके पर कुछ ही दूरी पर स्थित गांधी प्रतिमा को माल्यार्पण करने के बाद सड़क के दोनों ओर सैकड़ों की संख्या में मौजूद महिलाओं ने नादस्वरम और कोल्लम के साथ एक बड़ी शोभा यात्रा निकाली। भद्राचलम नरसिंह स्वामी मंदिर के एक अर्चक (पुजारी) कृष्ण चैतन्य ने श्रद्धेय तिरुप्पनलवार की वेशभूषा धारण किए दलित समुदाय से आने वाले रवि को अपने कंधे पर उठा लिया और उन्हें मंदिर में ले गए।

इस खास उत्सव में शामिल हुए चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी सीएस रंगराजन ने कहा कि इसे एक वैष्णव आचार्य भगवद रामानुज की शिक्षाओं के उत्सव के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने एक गैर-भेदभावपूर्ण और समतावादी समाज के लिए संघर्ष किया।

ALSO READ:  "न्याय" कभी भी "बदला" नहीं हो सकता, मुख्य न्यायधीश एस ए बोबडे का बड़ा बयान

उन्होंने ने कहा, “सनातन धर्म में ईश्वर के बाद सभी को एक समान माना जाता है। तथाकथित भेदभाव केवल हाल के दिनों में ही शुरू हुआ है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम दुनिया में अलग-अलग लोगों के बीच आने वाले भेदभावों को खत्म करें।”

बता दें कि दो साल पहले भी हुए इस उत्सव के दौरान मंदिर के मुख्य पुजारी ने दलित व्यक्ति को कंधे पर बिठाकर मंदिर तक पहुंचाया था। तेलंगाना में होने वाली मुनि वाहन सेवा तमिलनाडु में 2700 साल से चले आ रहे समारोह का ही एक रूप है।

यह समारोह खास तौर पर विभिन्न वैष्णव मंदिरों में मनाया जाता होते है। इनमें सनातन धर्म के रीति-रिवाज माने जाते हैं। गौरतलब है कि चिलकुर बालाजी मंदिर के मुख्य पुजारी सीएस रंगराजन ने ही सबसे पहले अप्रैल 2018 में दलित युवक आदित्य परासरी को कंधे पर बिठाकर जियागुड़ा स्थित रंगनाथ स्वामी मंदिर के अंदर पहुंचाया था।

ALSO READ:  Women's Day : अस्मिता बचाने को 'महिला शक्ति की मिसाल' का जवाब थीं वो दलित महिला

आप ग्राउंड रिपोर्ट के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।