तीरथ सिंह रावत बने उत्तराखंड के नए मुख्यमंत्री, उनमें ऐसा क्या है जो त्रिवेंद्र में नहीं था?

कौन हैं तीरथ सिंह रावत
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उत्तराखंड में त्रिवेंद्र रावत के इस्तीफे के बाद नया मुख्यमंत्री चुन लिया गया है। उत्तराखंड के पहले शिक्षा मंत्री रहे तीरथ सिंह रावत अब राज्य के नए मुख्यमंत्री होंगे।  निवर्तमान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बैठक खत्म होने के बाद नए मुख्यमंत्री (Tirath Singh Rawat) के नाम का ऐलान किया।

आज सुबह भाजपा कार्यालय पर बुलाई विधायक दल की बैठक में नए सीएम के रूप में तीरथ सिंह रावत के नाम पर मुहर लगी। इस बैठक में छत्‍तीसगढ़ के पूर्व मुख्‍यमंत्री और उत्‍तराखंड के प्रभारी रमन सिंह, रमेश पोखरियाल के अलावा कार्यवाहक मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, प्रदेश अध्‍यक्ष बंशीधर भगत, दुष्‍यंत कुमार गौतम, यशपाल आर्य, रेखा आर्य समेत उत्‍तराखंड से भाजपा के तमाम सांसद और विधायक मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री चुने जाने का बाद रावत ने कहा, ‘मुझे जो जिम्मेदारी मिली है उसे पूरी तरह से निभाऊंगा। त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सीएम रहते जो काम किए उन्हें मैं आगे बढ़ाने का काम करूंगा। प्रदेश की भलाई के लिए काम करूंगा।’

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तीरथ सिंह रावत के बारे में मुख्य बातें-

उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत छात्र जीवन में ही हो गई थी। वह हेमवती नंदन गढ़वाल विश्वविद्यालय में छात्र संघ अध्यक्ष और छात्र संघ मोर्चा (उत्तर प्रदेश) में प्रदेश उपाध्यक्ष भी रहे।

पहली बार तीरथ सिंह रावत (Tirath Singh Rawat) पौड़ी सीट से भारी मतों से लोकसभा का चुनाव जीते थे।

वर्ष 2000 में नवगठित उत्तराखण्ड के प्रथम शिक्षा मंत्री चुने गए थे। इसके बाद 2007 में भारतीय जनता पार्टी उत्तराखण्ड के प्रदेश महामंत्री चुने गए। 

वर्तमान में वो भाजपा के राष्ट्रीय सचिव के साथ साथ गढ़वाल लोकसभा से सांसद भी हैं। 

क्यों बदलना पड़ा उत्तराखंड में मुख्यमंत्री?

उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। राज्य में बीजेपी विधायकों में त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर संशय की स्थिति थी। उनकी शिकायत दिल्ली तक भेजी गई थी। उनपर आरोप था की वो संगठन को साथ लेकर नहीं चल रहे हैं। आने वाले चुनावों में अगर त्रिवेंद्र रावत मुख्यमंत्री रहे तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। ऐसे कई सारे फैसले त्रिवेंद्र रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए लिए जो पार्टी के नेताओं को रास नहीं आ रहे थे। इसी के चलते उनकी छुट्टी कर दी गई और तीरथ सिंह रावत को यह ज़िम्मेदारी सौंपी गई है।

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तीरथ सिंह रावत संघ से आते हैं। संगठन और पार्टी में उनकी अच्छी खासी पैठ है। जब बीजेपी की सरकार बनी थी तब भी तीरथ सिंह (Tirath Singh Rawat) मुख्यमंत्री की रेस में थे। त्रिवेंद्र रावत के राज में लोकसभा सांसदों की अनदेखी होती रही उन्होंने कभी इस दूरी को पाटने की भी कोशिश नहीं की। राज्य में देश के शिक्षा मंत्री रमेंश पोखरियाल निशंक का अच्छा खासा दबदबा है। त्रिवेंद्र सिंह रावत को लेकर निशंक भी नाराज़ थे। तीरथ सिंह को चुनने के पीछे एक संदेश देना भी है कि संगठन को साथ लिए बगैर कोई ज़्यादा देर कुर्सी पर नहीं बैठ सकता है।

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