क्या चंद सीटों का लालच डुबो देगा कांग्रेस की लुटिया?

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न्यूज़ डेस्क।। मध्यप्रदेश में बसपा और कांग्रेस का गठबंधन अभी तक नहीं हो पाया है, बसपा ने कांग्रेस पर दबाव बनाने के लिए अकेले चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। और इसका असर दिख भी रहा है, कमलनाथ ने आज बयान जारी कर कहा कि अभी बसपा से गठबंधन को लेकर बातचीत चल रही है। हमारा एक ही मक़सद है भाजपा को हराना। मतलब ज़ाहिर है, कांग्रेस बसपा को अपने पाले में लाने के लिए भरसक प्रयास कर रही है। मायावती उन सभी सीटों पर लड़ना चाहती हैं जहां पिछली बार कांग्रेस हारी थी, ऐसे में कांग्रेस के लिए मायावती को मनाना चुनौती भरा काम है। अगर कांग्रेस कोई सर्वसम्मत फॉर्मूला नहीं लाती और बसपा अकेले चुनाव लड़ती है तो सबसे ज़्यादा नुकसान कांग्रेस को ही होगा क्योंकि मध्यप्रदेश में दलित वोट काफी मात्रा में है और यह वोट कांग्रेस और बसपा में बंट जाएगा जिसका सीधा फायदा भाजपा को होगा।

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मायावती छत्तीसगड़ की तरह ही मध्यप्रदेश में भी क्षेत्रीय पार्टियों को साथ लाने की कवायद में लगी हुई हैं। अगर कांग्रेस से बात नहीं बनी तो वो गोंडवाना गणतंत्र और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती हैं।

कांग्रेस के पास पिछले 15 साल का वनवास खत्म करने का यही मौका है ऐसे में अगर कुछ सीटों के चलते यह गठबंधन पटल पर नहीं आया तो नुकसान कांग्रेस ही उठाएगी।