एम्स में स्टूडेंट्स, रिसर्चर्स की फीस बढ़ी तो मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ेगा : SYS AIIMS

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Ground Report News Desk | New Delhi

JNU में फीस बढ़ोत्तरी के बाद अब मोदी सरकार AIIMS में फीस बढ़ाने की तैयारी में है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एम्स प्रशासन को निर्देश जारी कर कहा है कि, वह अपने मरीजों के लिए यूजर चार्जेज की समीक्षा कर एक मॉडल सूची तैयार करें, जिसे देश के बाकी एम्स में भी जारी किया जा सकें। इस खबर के बाद AIIMS की SYS सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट ने कहा है कि अगर छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स की फीस बढ़ाई जाती है तो हमें मजबूरन सड़कों पर उतरना होगा।

इस पूरे मामले में ग्राउंड रिपोर्ट से विशेष बातचीत में एम्स की SYS सोसाइटी ऑफ यंग साइंटिस्ट के चेयरमेन लाल चंद्र विश्वकर्मा ने कहा कि, देश में शिक्षा हर नागरिक का अधिकार है। शिक्षा हर एक वर्ग के लोगों की पहुंच में होना चाहिए। कोई गरीब छात्र सिर्फ पैसों के अभावों में शिक्षा से वंचित नहीं होना चाहिए।

READ:  मध्यप्रदेश के बड़नगर के विधायक के बेटे पर लगा रेप का आरोप,हुई FIR

इसके बाद SYS चेयरमेन लाल चंद्र ने कहा कि, सरकार को सोच-समझकर फैसला लेने की जरूरत है। अगर AIIMS में स्टूडेंट्स और रिसर्च स्कॉलर्स की फीस बढ़ाई जाती है तो हमें भी सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

यह भी पढ़ें : JNU के बाद अब AIIMS की फीस बढ़ाने की तैयारी में मोदी सरकार

बता दें कि एम्स के बेहतर संचालन के लिए गठित केंद्रीय इंस्टिट्यूट बॉडी ने मेडिकल एजुकेशन और मरीजों के इलाज के शुल्क की समीक्षा करने का फैसला किया है। इस फैसले के चलते आने वाले दिनों में एम्स में एमबीबीएस और पीजी की ट्यूशन फीस बढ़ना तय माना जा रहा है।

READ:  Delhi Covid wave worsens: 8 cases per minute, 3 deaths every hour

वहीं इस बात की भी खबर है कि एम्स में इलाज का खर्च एक समान तय करने की योजना बनाई जा रही है, जिसके चलते यहां इलाज का खर्च बढ़ जाएगा। एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर और मेडिकल स्टूडेंट्स ने मोदी सरकार के इस नए फरमान का विरोध शुरू कर दिया है।

इससे पहले एम्स ने 20 नवंबर को एक आदेश जारी कर कहा था कि, केंद्र सरकार ने ट्यूशन फीस और इलाज के शुल्क की समीक्षा करने के लिए कहा है। सभी विभागों से 25 नवंबर तक मौजूदा शुल्क का डाटा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।