गंगा मां के बेटे ‘मोदी जी’ को नहीं चिंता, इधर सच्चे भक्त ने प्राण गंवा दिए

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न मैं आया, न मुझे लाया गया है …..मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है। 5 साल पहले टीवी पर चुनाव प्रचार के लिए यह लाइन आपने लगातार बीजेपी के उम्मीदवार मोदी जी के मुंह से सुनी होगी। इसके बाद एक वाक्या सुना होगा कि भारत की जल संसाधन, नदी विकास और गंगा सफाई मंत्री उमा भारती ने कहा था अगर 2018 तक गंगा साफ नहीं हुई तो जल समाधी ले लूंगी। लेकिन सबकुछ भूला दिया गया। अरबों रूपए का बजट गंगा जल को जरा भी साफ नहीं कर पाया। बता दें, भारत की राजनीति नीचता के स्तर पर जा गिरी। कोई जल समाधी नहीं ली गई और न ही गंगा धर्म निभाया गया। सब जगह खामोशी है। वहीं एक आदमी गंगा को साफ कराने की जिद्द में अपने प्राण त्याग गया। आमरण अनशन पर बैठे स्वामी सानंद की आज दोपहर बाद निधन हो गया। है।

उनकी मांग गंगा की अविरलता और निर्मलता को बनाए रखने के लिए विशेष एक्ट पास कराना था जिसके लिए वह २२ जून से आमरण अनशन पर बैठे थे। उनकी मौत की पुष्टी आज एम्स के जनसंपर्क अधिकारी हरीष थपलियाल ने की है।

स्वामी ने गंगा की रक्षा के लिए जल भी त्याग दिया था। अफसोस एक आदमी प्राण त्याग गया और राजनीति सो रही है। यह गंगा के ठेकेदार सो रहे हैं।

सिलसिलेवार पढें स्वामी सानंद के आमरण अनशन के संघर्ष
– स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 22 जून से गंगा के लिए कानून बनाने की मांग को लेकर अनशनरत थे।
– जबरन स्वामी सानंद को उठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती कराया था
– सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से वार्ता विफल होने के बाद मंगलवार को उन्होंने जल भी त्याग दिया था।
– बुधवार को पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार दोपहर 12:30 बजे पुलिस बल मातृसदन पहुंचा था।
– इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट और कनखल सीओ मातृसदन पहुंचे।
– आश्रम में धारा 144 लगाए जाने की बात कही। इस पर स्वामी शिवानंद भड़क गए और आश्रम में धारा 144 लगाना नियमों के विरुद्ध बताया।
– इसके बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने स्वामी शिवानंद से सानंद को ले जाने की अनुमति मांगी।
– सिटी मजिस्ट्रेट के आग्रह को स्वामी शिवानंद मान गए। मगर स्वामी सानंद ने जाने से इनकार कर दिया था।

– इसपर सिटी मजिस्ट्रेट सहित पुलिस बल ने जबरन स्वामी सानंद को उठाकर एंबुलेंस में बैठाकर एम्स ऋषिकेश में भर्ती करा दिया था।
– कई बार एम्स में भर्ती कराया गया, लेकिन स्वामी ने अनशन नहीं तोड़ा।

– स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने गंगा रक्षा के लिए अपनी तरफ से तैयार ड्राफ्ट के आधार पर एक्ट बनाने के लिए केंद्र सरकार को नौ अक्तूबर तक का समय दिया था। मांग पूरी न होने पर वह दस अक्तूबर से जल त्यागकर अनशन पर बैठ गए थे।

– स्वामी सानंद ने 13 जून को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। लेकिन पत्र का कोई जवाब न आया।
इसके बाद वह 22 जून को अनशन पर बैठ गए।
– कुछ दिनों बाद प्रशासन ने उन्हें जबरन उठाकर एम्स में भर्ती कराया था।
– कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद उन्हें वापस मातृसदन छोड़ा गया था।
– केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने मातृसदन में स्वामी सानंद ने मिलकर अनशन समाप्त करने की अपील की थी।
– इस बीच उन्हें कई बार एम्स में भर्ती कराया गया, लेकिन स्वामी ने अनशन नहीं तोड़ा।