स्विस बैंको में जमा भारतीय धन में 50 फीसदी की बढ़ोतरी, क्या विदेशों में जमा काला धन वापस लाने के मोदी सरकार के सारे प्रयास असफल हो चुके हैं?

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नई दिल्ली: मोदी सरकार की कालेधन पर की गई सर्जीकल स्ट्राईक नाकाम नज़र आने लगी है। नोटबंदी के बाद कहा जा रहा था की इससे काला धन खत्म हो गया है। लेकिन स्विट्ज़रलेंड के केंद्रीय बैंक के ताज़ा आंकड़े कुछ और ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। इन आंकड़ो के मुताबिक स्विस बैंको में जमा भारतीयों के धन में 50 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। साल 2017 में 50 फीसदी की वृद्धी के साथ यह 1.01 अरब फ्रेंक यानी 7000 करोड़ रुपए के करीब पहुंच गया है।

स्विस नेशनल बैंक के सालाना जारी किए जाने वाले आंकड़ों को देखें तो पता चलता है की स्विस बैंक खातों में जमा भारतीय धन 2016 में 45 प्रतिशत घटकर 67.7 करोड़ फ्रेंक यानि 4500 करोड़ रुपए था जो 2017 में बढ़कर 7000 करोड़ तक पहुंच गया है।

स्विस बैंक खातों में रखे भारतीयों के धन में 2011 में इसमें 12%, 2013 में 43%, 2017 में इसमें 50.2% की वृद्धि हुई. इससे पहले 2004 में यह धन 56% बढ़ा था।

भारत सरकार के प्रायासों के बाद स्विट्ज़रलैंड और भारत के बीच सूचना के आदान-प्रदान की एक नयी व्यवस्था लागू की गई है। जिससे स्विस बैंको में जमा भारतीय धन का पता लगाया जा सके। लेकिन यह आंकड़े भारत सरकार के लिए चिंता का विषय है क्योंकि यह आंकड़े विदेशों में जमा कालेधन पर लगाम लगाने के सरकारी प्रयासों और वादों की नाकामी की कहानी कह रहे हैं।

काले धन के मुद्दे को मोदी सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनावों में खूब भुनाया था और आम जनता को एक सपना दिखाया था की विदेशों में जमा काला धन अगर भारत वापस आ गया तो हर एक व्यक्ति के एकांउट में 15 लाख रुपए जमा किए जा सकते हैं। मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद कई प्रयास किए भी। लोगों को स्वतः कालाधन घोषित करने के लिए प्रेरित किया गया। लेकिन सारे प्रयास असफल साबित हुए। नोटबंदी के बाद कितना काला धन पकड़ा गया इसका भी सरकार के पास कोई ठोस आंकड़ा नहीं है।

अपनी सरकार के 4 साल पूरे कर चुकी मोदी सरकार फिर से चुनावों के मुहाने खड़ी है। लेकिन जिन मुद्दों पर उसने कांग्रेस को घेरकर चुनाव जीता था, वे सभी मुद्दे आज उसी के सामने आकर खड़े हो गए हैं। महंगाई, गिरता रुपया, पेट्रोल-डीज़ल की कीमते, काला धन, भ्रष्टाचार और किसानों की समस्या 4 साल बाद भी जस की तस दिखाई दे रही है। इस बार के चुनावों में सरकार को अपने हर काम का हिसाब देने के लिए तैयार रहना होगा। क्योंकि इस बार चुनाव वो केवल कांग्रेस को कोस कर और सपने दिखाकर नहीं जीत सकते।

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