प्राईवेट बस मालिकों को अनलॉक के बाद भी नहीं है राहत

पंजाब: अनलॉक के बाद भी प्राइवेट बस मालिकों को नहीं मिल रही राहत

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राजेंद्रपाल सिंह पंजाब के शहर बठिंडा के रहने वाले हैं और एक प्राइवेट बस में ड्राईवर की जॉब करते हैं। पिछले दस सालों से यही काम कर रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान उनका काम बिल्कुल बंद हो गया जिसके चलते उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना। अब अनलॉक होने के बाद काम पर वापिस लौटने पर बताते हैं,-


अब वापिस काम पर आने से कुछ राहत मिली है, लॉकडाउन के दौरान बिल्कुल भुखमरी जैसी स्थिति हो गई थी, ना कोई काम था और ना ही पैसे। अब कुछ पैसे मिलने लगे हैं।’’  

निराश होकर वे बताते हैं कि पहले की बजाये अब सैलरी में कटौती की गई है। पहले मुझे 12000 रूपये प्रति महीना मिलते थे लेकिन अब वो महज 6000 रूपये प्रति महीना कर दिया है। लेकिन ये कहानी अकेले राजेंद्रपाल सिंह की नहीं है। लगभग राज्य का हर निजी बस चालक इस समस्या से जूझ रहा है।

कोरोना संक्रमण के दौरान लगे लॉकडाउन के अब अनलॉक की प्रक्रिया अब देशभर में चल रही है, जिसके चलते लोगों को शर्तों के साथ कुछ राहते दी गई हैं। लेकिन आम लोगों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही। ऐसा ही कुछ हम पंजाब के प्राइवेट बस चालकों के साथ देखने को मिल रहा है। लॉकडाउन के दौरान पहले ही लगभग 3 महीने तक परिवहन बंद रहने की वजह से उन्हें काफी नुकसान का सामना करना पड़ा है। अब प्राइवेट बसों को वापिस सड़क पर बस लाने की सरकारी अनुमति मिल गई है। लेकिन संकट वैसे का वैसे ही बना हुआ है।

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रमेश कुमार जो की पंजाब के ही जिला मानसा के एक कस्बे सरदुलगढ़ के रहने में वाले हैं, उनके पास दो बसों हैं जिसमें से एक वो खुद चलाते हैं और एक को चलाने के लिए ड्राइवर को काम पर रखा हुआ है। ड्राइवर की सैलरी में कटौती पर बात करने पर बताया, ‘‘ यह हमारे लिए भी बड़ी मुश्किल की घड़ी है। हमें समझ में नहीं आ रहा कि इस से कैसे निजात पाई जाए। स्कूल, कॉलेज और तमाम दफ्तर बंद होने की वजह से रोज़ाना के यात्रियों काफी कमी हुई है। ऐसे में डीजल-तेल का खर्चा निकालना काफी मुश्किल हो चुका है। सरकार बस परमिट जारी करने के लिए उतना ही पैसा ले रही है जो पहले तय हुआ था उसमें कोई कटौती नहीं की गई है। जबकि लॉकडाउन में हमारी बसों से एक रूपये की कमाई नहीं हुई। पेट्रोल-डीजल के दाम किस कदर बढ़ रहे है ये तो आप जानते ही हैं।’’ रुआँसा होकर रमेश कहते है, ऐसे में हमारे लिए चुनौती है कि कैसे बसों को चलाया जाए। अगर यही हालात रहे तो बसें बंद करने  की नौबत आ सकती है।

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जरनैल सिंह जो कि एक निजी बस में बस कंडक्टर हैं और मानसा से बठिंडा से मानसा जाने वाली बस में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया, ‘‘ अनलॉक के दो चरण पूरे हो चुके हैं इसके बावजूद भी यात्रियों की संख्या काफी कम है। पहले पूरे दिन में 15000 तक यात्री सफर करते थे अब मात्र 3000-4000 तक ही यात्री सफर करते हैं जो कि काफी कम है। ज्यादातर दफ्तरों में वर्क एट हॉम होने की वजह से बंद है जिसका असर उनके कारोबार पर पड़ा है। पहले बस स्टैंड से लगभग 30-35 सवारी मिल जाती थी लेकिन अब 7 से 10 काम चलाना पड़ रहा है। ’’

राज्य की अलग-अलग प्राइवेट बस सर्विस जिला कमेटी सरकार से गुहार लगा रही हैं कि डीजल के दाम कम किए जाए साथ ही परमिट फीस और अन्य शुल्कों में कटौती की जाए। लेकिन सरकार इस पर ना कोई काम कर रही है और ना ही कोई आश्वासन दिया है।

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Written by Sajan Kumar, He is journalism graduate from Indian Institute of Mass Communication.

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