प्रवासी मजदूरों को सकुशल घर पहुंचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया ये आदेश

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Ayushi Verma | New Delhi

देश में कोरोना (Coronavirus) महामारी के लगभग 267,249 मरीज़ हैं और 7,478 लोगो की मौत हो गयी है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को आदेश देते हुए कहा कि सभी केंद्र और राज्य सरकारें प्रवासी मजदूरों को 15 दिनों के अंतर्गत उनके गृहराज्य पहुंचाने की निति बनाएं। जिससे कि अन्य राज्यों में फंसे हुए मजदूर अपने घर पहुच जाएं। प्रवासी मजदूरों को अपने घर जाने में हो रही परेशानी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को दिए ये आदेश
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस शाह, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजय किशन कॉल की बेंच ने ये आदेश दिए हैं। इनमें यह बताया गया है कि श्रमिक रेलवे की मांग को भारतीय रेल 24 घंटों में पूरा करें। मज़दूरों की सहायता के लिए काउंसिल सेंटर बनाए जाएं। मजदूरों को योजनाओं का लाभ मिले। मजदूरों के ख़िलाफ़ दर्ज हुए सभी केस वापस लेने के भी आदेश इसमें शामिल हैं। राज्य, प्रवासी मजदूरों की व्यवस्थित रूप से सूची तैयार करें और उनके लिए रोज़गार को लेकर भी योजनाएं बनाएं।

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बता दें कि लॉक डाउन के चलते मजदूरों के पास न तो खाने का कुछ बचा है और न ही उनके पास पैसे हैं। ऐसे में उनका घर पहुंचना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से मजदूरों के सकुशल घर पहुंचने की एक उम्मीद सी जगी है। लेकिन इसके सबसे जरूरी है केन्द्र और राज्य सरकारें मिलकर इन आदेशों का कठोरता से पालन करें।

गौरतलब है कि कई मजदूर भूख से, कुछ बीमारी से तो कुछ सिर्फ पानी न मिलने से प्यासे ही मर गए। कुछ मजदूर बेबसी और लाचारी के इस दौर में अपनी हिम्मत खो बैठे और ट्रेन की पटरी के नीचे आकर जान दे दी। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का ये आदेश मजदूरों के लिए एक नई उम्मीद की किरण सा है।

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