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सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण पर लगाया एक रुपये का जुर्माना

प्रशांत भूषण अवमानना केस
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उच्चतम न्यायालय ने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण के खिलाफ अवमानना मामले में सोमवार को उनपर एक रुपये का जुर्माना लगाया. इसी बीच वरिष्ठ अभिभाषक राजीव धवन ने जुर्माना भरने के लिए भूषण को एक रुपया का सिक्का दिया. फैसले को लेकर वरिष्ठ वकील का कहना है कि वे आज शाम को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कांफ्रेंस करेंगे और अपने अगले कदम के बारे में भी बताएंगे.

लाइव लॉ के अनुसार, जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने भूषण को निर्देश दिया कि वे 15 सितंबर तक जुर्माना जमा करें. ऐसा कर पाने में विफल होने पर उन्हें तीन महीने की जेल होगी और तीन साल तक वकालत करने से रोक दिया जाएगा.

फैसला सुनाने के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रशांत भूषण ने कोर्ट से पहले अपने बयान मीडिया को दिए, ये गलत था. कोर्ट के फैसले जनता के विश्वास और मीडिया की रिपोर्ट से नहीं होते. हम भी अटॉर्नी जनरल की इस दलील से सहमत हैं कि भूषण ने कोर्ट की अवमानना की है. हम भी चाहते हैं कि वो माफी मांगें, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया है.

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फैसला पढ़ते वक्त जस्टिस अरुण मिश्रा ने प्रशांत भूषण के वकील राजीव धवन की ओर से पेश की गई दलीलों का हवाला देते हुए कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर बेंच का अपना निष्कर्ष नहीं है. दरअसल, धवन का कहना था कि अगर स्टेटमेंट देना ग़लत है तो फिर जजों की प्रेस कॉन्फ्रेंस करना भी गलत है, तो जज यहां धवन की दलील पढ़ रहे थे.

बता दें कि जुलाई महीने के आखिरी सप्ताह में जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने जून महीने में भूषण द्वारा किए ट्वीट पर स्वत: संज्ञान लिया था और उनके दो ट्वीट्स, जिनमें से एक में उन्होंने देश के मुख्य न्यायाधीश पर टिप्पणी की थी, के लिए अवमानना का नोटिस जारी किया था.

भूषण ने इसके जवाब में दिए हलफनामे में कहा था कि सीजेआई को सुप्रीम कोर्ट मान लेना और कोर्ट को सीजेआई मान लेना भारत के सर्वोच्च न्यायालय की संस्था को कमज़ोर करना है. इसके बाद 14 अगस्त को पीठ उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया था और 20 अगस्त को सजा सुनाने पर बहस सुनी थी. इसके बाद भूषण का जवाब मिलने पर 25 अगस्त को पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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