सुप्रीम कोर्ट ने सुनाए 4 दिन में ये 7 अहम फैसले

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न्यूज़ डेस्क।। सुप्रीम कोर्ट में फैसलों की मानो झड़ी लग गयी हो। पिछले 4 दिनों आए इन फैसलों से धर्म, समाज और राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। आइये जानते हैं क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के यह फैसले..

25 सितंबर 2018

1.दागी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाने का फैसला संसद पर छोड़ा

फैसला:सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने कहा गंभीर किस्म के अपराधों में आरोपित किसी नेता को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता। जिनपर आरोप है उन्हें नामांकन के समय मोटे अक्षरों में लिखकर ये जानकारी देनी होगी। राजनीतिक दलो को दागी उम्मीदवार की जानकारी अपनी वेबसाइट पर 3 बार दिखानी होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा जनता को यह जानने का पूरा हक है कि उम्मीदवार का क्या इतिहास है। कोर्ट ने इस मसले पर कानून बनाने की ज़िम्मेदारी संसद पर छोड़ दी है।

प्रभाव: लोकतंत्र में दागी उम्मीदवार और आपराधिक प्रवत्तियों के नेताओं का चुनकर आना बहुत घातक साबित होगा। संसद को इसपर कानून बनाकर राजनीति को स्वच्छ करने की पहल करनी चाहिए।

26 सितंबर 2018

2.आधार कार्ड की अनिवार्यता पर फैसला

सुप्रीम कोर्ट की 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने आधार पर बहुमत से फैसला सुनाते हुए इसे संवैधानिक ठहराया। मोबाइल नंबर, बैंक खातों और सरकारी सेवाओं से आधार की अनिवार्यता को समाप्त करते हुए पैन कार्ड आयकर रिटर्न, और सरकारी योजनाओं में इसे अनिवार्य कर दिया गया। आधार से निजता के हनन के आरोपों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बायॉमेट्रिक डेटा की सुरक्षा के लिए सरकार को कानून बनाने का आदेश दिया।

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प्रभाव: सरकारी सेवाओं से आधार की अनिवार्यता समाप्त हो जाने से कोई भी बच्चा परीक्षा और शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। समाज के पिछड़े और गरीब समुदाय को सरकारी योजना का सीधा लाभ मिलेगा। देश के हर व्यक्ति तक बेहतर सुविधाएं त्वरित रूप में पहुंच पाएगी। कॉरपोरेट कंपनिया आधार का दुरुपयोग नहीं कर पाएंगी।

26 सितंबर 2018

3.पदोन्नति में आरक्षण पर लागू होगा क्रीमीलेयर नियम

सुप्रीम कोर्ट नें प्रमोशन में आरक्षण पर फैसला सुनाते हुए कहा कि एससी एसटी आरक्षण में भी क्रीमीलेयर का सिद्धांत लागू होगा। कोर्ट ने कहा आरक्षण का मुख्य उद्देश्य पिछड़े वर्ग के लोगों को बाकियों की तरह समान अवसर उपलब्ध करवाना है। यह संभव नहीं कि उस वर्ग के अंदर केवल क्रीमीलेयर ही सरकारी क्षेत्र में प्रतिष्ठित नौकरियां हासिल कर ले और अपनी स्थिति सुदृढ़ कर ले जबकि उस वर्ग के शेष लोग पिछड़े ही बने रहें, जैसा कि वे हमेशा से थे।

प्रभाव: अब प्रमोशन में भी आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है। पिछड़े वर्ग के लोगों को समान अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

26 सितंबर 2018

4.सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई का प्रसारण किया जा सकेगा

राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों की सुनवाई अब आम जनता भी देख सकेगी। अदालती कार्यवाही के सीधे प्रसारण के लिए सुप्रीम कोर्ट ने इजाज़त दे दी है। इससे पहले किसी भी तरह के वीडियो रिकॉर्डिंग की इजाज़त नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कीटाणुओं के नाश के लिए सूरज की रौशनी बेहतर है। केवल कुछ खास मामलों की सुनवाई के दौरान प्रसारण नहीं किया जा सकेगा।

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प्रभाव: न्ययालय की कार्य प्रक्रिया से आम जन अवगत होगा। और इस प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। न्याय व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा।

27 सितंबर 2018

5.मस्ज़िद में नमाज़ पर फैसला, अयोध्या मामले की होगी जल्द सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में ज़मीन अधिग्रहण को लेकर एक टिपण्णी की थी, जिस जमीन पर मज़्ज़िद है सरकार उसका अधिग्रहण कर सकती है। नमाज़ कहीं भी पढ़ी जा सकती है, इसके लिए मस्ज़िद ज़रूरी नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा है और बड़ी बेंच को सौंपने से इनकार कर दिया है। इस फैसले से अदालत का समय बचेगा और अयोध्या रामजन्म भूमि विवाद की जल्द सुनवाई शुरू हो सकेगी।

प्रभाव: न्ययालय की नज़र में मंदिर, मस्ज़िद, गुरुद्वारा चर्च सब एक समान है। सरकार अब ज़रूरत पड़ने पर मज़्ज़िद का भी अधिग्रहण कर सकती है।

27 सितंबर 2018

6.विवाहेतर संबंध अपराध नहीं, धारा 497 निरस्त

व्यभिचार को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा 497 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा यह कानून महिलाओं के सम्मान को ठेस पहुंचाता है। इस प्रावधान ने महिलाओं को पतियों की संपत्ति बना दिया था।

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प्रभाव: मानव जीवन के सम्मानजनक अस्तित्व के लिए स्वायत्ता स्वभाविक है और धारा 497 महिलाओं को अपनी पसंद से वंचित करती है। इसके खत्म हो जाने से महिलाओं को और स्वायत्ता मिलेगी।

28 सितंबर 2018

7.सबरीमाला मंदिर के दरवाज़े महिलाओं के लिए खोले गए

केरल के सबरीमाला मंदिर में 10-50 वर्ष की महिलाओं को जाने की इजाज़त नहीं थी। मंदिर में महिलाओं के मासिक धर्म के चलते यह रोक थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे मनमाना और असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि महिला भी भगवान की ही रचना है उसे पुरुष से किसी मामले में कमज़ोर मानकर भेदभाव करना उचित नहीं है। संविधान में महिलाओं को पुरुषों के समान माना गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा मंदिर एक सार्वजनिक केंद्र है यह कोई प्राइवेट प्रॉपर्टी नहीं जहां मनमाना कानून लागू किया जाए। मंदिर में एंट्री पर रोक हटाकर सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाया।

प्रभाव: इस फैसले का समाज पर गहरा प्रभाव होगा। अब महिलाओं के साथ धार्मिक स्थलों पर होने वाले भेदभाव पर रोक लगेगी। दूसरे धर्मों में भी महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है। उन धर्मों में भी महिलाएं अपना हक मांग पाएंगी। यह फैसला समाज को एक नई दिशा देगा।