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गन्ना किसानों के 3050 करोड़ रुपए हड़प कर गई यूपी की शुगर मिलें

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Ground Report | News Desk UP

कोरोना के कारण देश आर्थिक संकट से जूझता दिख रहा है । लाखों-करोड़ों नौकरियां ख़त्म होने की कगार पर हैं । कोरोना की दोहरी मार झेल रहे प्रवासी मज़दूर इससे अधिक प्रभावित हैं । वहीं, देश का किसान भी कोरोना के चलते उभरे संकट से इसकी मार झेल रहे हैं । कोरोना काल में पहले से ही परेशान चल रहे किसान गन्ना बकाया भुगतान नहीं होने से और भी ज्यादा बेहाल हो गए हैं।

अमर उजाला की एक रिपोर्ट के अनुसार बीते कई वर्षों से किसानों का गन्ना मूल्य न चुकाने वाली मेरठ मंडल की शुगर मिल ने इस इस वर्ष भी किसानों का गन्ना मूल्य चुकाए बिना ही मिल बंद कर दी । मिलों ने 1 जून तक खरीदे 5149 करोड़ रुपये के गन्ने का केवल 2098 करोड़ रुपये का ही भुगतान किया है। मिलों के पास किसानों का करीब 3050 करोड़ रुपया दबा है।

उत्तर प्रदेश गन्ना आपूर्ति एवं खरीद अधिनियम में गन्ना खरीदने के 14 दिन के अंदर गन्ना मूल्य का बकाया भुगतान करने का प्रावधान है। इसके बाद बकाया पर 15 फीसदी विलंब ब्याज देय होता है। इतना सख्त कानून होने के बाद भी शुगर इंडस्ट्री बेखौफ होकर किसानों को हर साल खून के आंसू रुलाती है। सभी मिलों को बकाया भुगतान करने के लिए नोटिस तामील कराए गए हैं। हाल ही में मिलें बंद हुई हैं। भुगतान के लिए पूरा दबाव बना रखा है।

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मेरठ मंडल की 15 शुगर मिल पेराई सत्र 2019-20 का समापन कर बंद हो चुकी हैं। इन मिलों ने खरीदे गए गन्ने के देय मूल्य के सापेक्ष केवल 41 फीसदी का ही भुगतान किया है। 59 फीसदी बकाया मिलों की तिजोरी में बंद हो गया है। शुगर इंडस्ट्री कोरोना के चलते चीनी बिक्री नहीं होने की बात कह रही है। मिल प्रबंधन का भी कहना है कि जब तक चीनी नहीं बिकेगी, तब तक वह भुगतान करने की स्थिति में नहीं होंगे।

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