बेरोज़गारी से तंग आकर खुदकुशी करने वाले इस शख़्स का ख़त पढ़ लीजिए, PM मोदी तो अभी अनगिनत चिठ्ठी लिखेंगे

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Ground Report | News Desk UP

कोरोना वायरस के संक्रमण को व्यापक स्तर पर फैसने से रोकने के लिए सरकार ने देशव्यापी लॉकडाउन का फैसला लिया था मगर लगभग 3 महीनों से लगा ये देशव्यापी लॉकडाउन सफल होता दिख नहीं रहा है । स्वास्थ मंत्रालय की साइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, देश में कोरोना मरीजों की संख्या 1,73,763 तक पहुंच गई है। देशभर में अभी 86,422 सक्रिय मामले हैं, जबकि 82,370 मरीज ठीक हो चुके हैं। भारत में कोरोना वायस से मरने वाले लोगों का कुल आंकड़ा 4,971 तक पहुंच चुका है।

लॉकडाउन के कारण गई 400 से अधिक लोगों की जान

लॉकडाउन के चलते बेरोज़गारी की मार झेल रहे मज़दूरों की खुदकुशी का सिलसिला जारी है। एक रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के कारण 400 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं । ताज़ा मामला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से सामने आया है। यहां लॉकडाउन के चलते बेरोज़गार हुए शख़्स ने ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी। मृतक की पहचान मैगलगंज की नई बस्ती निवासी भानु प्रकाश गुप्ता के रुप में हुई है। मृतक के पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है। जिसमें लिखा है कि उसने खुदकुशी गरीबी और बेरोज़गारी से तंग आ कर की।

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भानु ने सुसाइड नोट में लिखा, “मैं यह सुसाइड गरीबी और बेरोजगारी की वजह से कर रहा हूं। गेहूं चावल सरकारी कोटे से मिलता है पर चीनी, पत्ती, दूध, दाल, सब्जी, मिर्च, मसाले परचून वाला अब उधार नहीं देता। लॉकडाउन बराबर बढ़ता जा रहा है। नौकरी कहीं नहीं मिल रही।” भानु ने आगे लिखा- “मुझे खांसी, सांस जोड़ों का दर्द, दौरा और अत्यधिक कमजोरी, चलना दूभर, चक्कर आदि हैं। मेरी विधवा मां भी 2 साल से खांसी-बुखार से पीड़ित हैं। तड़प-तड़प कर जी रहे हैं। लॉकडाउन बराबर बढ़ता जा रहा है। नौकरी कहीं मिल नहीं रही है, जो काम हो की खर्चा चलाएं व इलाज कराएं। हमें न कोई शासन का सहयोग मिला”

इस मामले पर प्रियंका गांधी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “एक दुखद घटना में यूपी के भानु गुप्ता ने ट्रेन के सामने आकर आत्महत्या कर ली। काम बंद हो चुका था। इस शख्स को अपना और माता जी का इलाज कराना था। सरकार से केवल राशन मिला था लेकिन इनका पत्र कहता है और भी चीजें तो खरीदनी पड़ती हैं। और भी जरूरतें होती हैं”

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बताया जा रहा है कि भानु गुप्ता एक होटल में काम करते थे। लेकिन लॉकडाउन के चलते होटल बंद हो गया और वो बेरोजगार हो गए। होटल बंद होने के बाद भी उन्होंने नौकरी की तलाश की लेकिन लॉकडाउन की वजह से उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिली। नतीजा ये हुआ कि उनके जो पैसे थे वो भी ख़त्म हो गए। अब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे थे, जिससे परेशान होकर भानु ने खुदकुशी कर ली।

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