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स्टेच्यू ऑफ यूनिटी में काम करने वाले कर्मचारियों को लॉकडाउन के बाद से नहीं मिला वेतन

statue of unity non payment of salary
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Ground Report | News Desk

2989 करोड़ की लागत से बन कर तैयार हुई दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ती स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue Of Unity) लॉकडाउन और कोरोना महामारी की वजह से संकट के दौर से गुज़र रही है। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक मार्च में लॉकडाउन की शुरुवात के बाद से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी में काम करने वाले कर्मचारियों को कॉन्ट्रैक्टिंग कंपनी Larsen & Tubro (L&T) ने तनख्वाह नहीं दी है। इसको लेकर वहां काम करने वाले कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन किया इसके बाद मैनेजमेंट ने एल एंड टी को नोटिस थमाया है।

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाने वाली कंपनी लारसन एंड टर्बो ही इस जगह का प्रबंधन भी करती है। वहां काम करने वाले सफाई कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड्स ने मार्च के बाद से सैलरी न मिलने की शिकायत की और धरना प्रदर्शन किया। करीब 400 कर्मचारियों को वेतन का भुगतान कंपनी ने अब तक नहीं किया है। इसको लेकर प्रशासन ने संज्ञान लिया और एल एंड टी को तुरंत कर्मचारियों के वेतन भुगतान का आदेश दिया है।

स्टैच्यू ऑफ युनिटी में अधिकतर उन आदिवासियों को नौकरी दी गई है जिनकी ज़मीन को सरकार ने पर्यटन स्थल बनाने के लिए अधिगृहित किया था। सरकार की ओर से जारी गाईडलाईन में यह साफ तौर पर कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों का वेतन नहीं रोका जाए। ऐसे में मैनेजमेंट संभालने वाली कंपनी पर सवाल खड़े होते हैं।

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी प्रधानमंत्री मोदी के महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट में से एक है। देश को एकता के सूत्र में बांधने वाले सरदार पटेल की विश्व की सबसे उंची मूर्ती यहां स्थापित की गई है। सरकार नर्मदा जिले के केवड़िया में स्थित इस जगह को पर्यटन स्थल के रुप में विकसित कर रही है। यहां रेल लाईन लगाने के साथ-साथ सरकार आसपास के क्षेत्र में मनोरंजन और पर्यटन के अन्य स्थल भी विकसित कर रही है।

लॉकडाउन में पर्यटन इंडस्ट्री को सबसे अधिक मार झेलनी पड़ रही है और इस क्षेत्र को महामारी से उबरने में काफी समय लगेगा। महामारी की वजह से पर्यटन स्थल देश भर में बंद हैं।

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