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किसान आंदोलन को बदनाम करने वाले राजनीतिक बयान

farmers not terrorist
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लाखों किसानों का नए कृषि आंदोलन के विरोध में दिल्ली में प्रदर्शन सत्ता धारी पार्टी के नेताओं को नागवार गुज़रा। उन्होंने किसानों को ही आतंकवादी, नक्सली और देशद्रोही बताना शुरु कर दिया। उनके अनुसार मोदी सरकार अगर कोई कानून लाई है तो उसका विरोध करना एंटीनेशनल एक्टिवटी ही है। ऐसे ही कुछ बयान जो इस आंदोलन के दौरान आए वो हम आपको बता रहे हैं।

‘प्रदर्शन उन्ही राज्यों में जिनकी सीमा पाकिस्तान से लगी है’

महेंद्र सिंह सिसोदिया, शिवराज सरकार में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री

महेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि साजिश के तहत किसान बिल का विरोध किया जा रहा है। बाहर से आकर लोग किसानों को आगे रखकर इस आंदोलन को भड़काने का काम कर रहे हैं। इन कृषि कानूनों का विरोध केवल पंजाब के उन्हीं क्षेत्रों में क्यों हो रहा है जहां की सीमा पाकिस्तान से लगी है। महेंद्र सिंह सिसोदिया ने कहा कि हमे जागरुक रहना है कि चाहे पाकिस्तान के लोग हो या कही और के, जो इस आंदोलन को भड़का रहे हैं, उन्हें हमें मिलकर रोकना होगा।

किसान आंदोलन में चीन-पाकिस्तान का हाथ

केंद्रीय मंत्री रावसाहेब दानवे

दिल्ली में जो किसान आंदोलन चल रहा है, वह किसानों का नहीं है। इसके पीछे चीन और पाकिस्तान का हाथ है। इस देश में मुसलमानों को पहले भड़काया गया। उन्हें कहा गया कि NRC आ रहा है, CAA आ रहा है और छह माह में मुसलमानों को इस देश को छोड़ना होगा। क्या एक भी मुस्लिम ने देश छोड़ा?’

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किसानों को बताया टुकड़े-टुकड़े गैंग

सुशील मोदी, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि दिल्ली के किसान आंदोलन में जिस तरह के नारे लगे और जिस तरह से इसे शाहीनबाग मॉडल पर चलाया जा रहा है, उससे साफ है कि किसानों के बीच टुकड़े-टुकड़े गैंग और सीएए-विरोधी ताकतों ने इसे हाईजैक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। देश के 90 फीसदी किसानों को भरोसा है कि जिस प्रधानमंत्री ने उन्हें स्वायल हेल्थ कार्ड और नीम लेपित यूरिया से लेकर किसान सम्मान योजना तक के लाभ दिये, वे कभी किसानों का अहित नहीं करेंगे।

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खालिस्तानी और माओवादी इस कानून का विरोध करने लगे हैं

अमित मालवीय, बीजेपी के IT विभाग के प्रमुख

बीजेपी के सूचना तकनीक विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक ट्वीट जारी कर दिल्ली सरकार के उस दस्तावेज को पेश किया, जिसमें दिल्ली सरकार ने दिल्ली में नये कृषि कानूनों को मंजूरी दी है। अमित मालवीय ने कहा है कि दिल्ली सरकार 23 नवंबर को ही नए कृषि कानूनों को मंजूरी दे चुकी है और अब इस कानून को लागू भी कर रही है।

अपने ट्वीट में प्रदर्शनकारी किसानों के लिए अमित मालवीय ने ‘खालिस्तानी’ और ‘माओवादी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए आगे लिखा  “…लेकिन अब जब खालिस्तानी और माओवादी इस कानून का विरोध करने लगे हैं तो अरविंद केजरीवाल को दिल्ली को तबाह करने का मौका मिल गया है, ये कभी भी किसानों से जुड़ा मामला नहीं था, ये सिर्फ राजनीति थी।”

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किसान आंदोलन में वामपंथी और माओवादी तत्व शामिल

पीयूष गोयल, केंद्रीय मंत्री

ये आंदोलन अब किसानों का नहीं रह गया है, क्योंकि इसमें वामपंथी और माओवादी तत्व शामिल हो गए हैं। गोयल ने कहा कि आंदोलन के जरिए ऐसे लोगों की जेल से रिहाई की मांग की जा रही हैं जो राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए सजा काट रहे हैं।

किसान आंदोलन के जरिए खालिस्तान समर्थक फिर से अपने पैर जमा रहे हैं

सत्यदेव पचौरी, कानपुर से लोकसभा सांसद

किसान आंदोलन के जरिए खालिस्तान समर्थक फिर से अपने पैर जमा रहे हैं और इन लोगों के मंसूबे विध्वंसकारी हैं। जिनके जरिए इंदिरा गांधी को मारा गया था, कांग्रेस उनके ही साथ है। कुछ राष्ट्रविरोधी ताकतें इस आंदोलन से जुड़ रही हैं।

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