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मध्यप्रदेश में किसान परेशान, फ़सल कटवाना भी पड़ रहा महंगा

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ग्राउंड रिपोर्ट | पल्लव जैन

मध्यप्रदेश का किसान इस समय चौतरफा मुसीबतों से घिरा हुआ है। भारी बारिश ने फ़सल को कमज़ोर और किसानों की आंखों को नम कर दिया है। खेत में फसल खड़ी है, कटाई का समय हो चुका है, लेकिन किसान इंतेज़ार करने को बेबस है। फसल कटवाने के लिए मज़दूरों की ज़रूरत है जो मिल नहीं रहे, अगर मिल भी जाएं तो उनकी मज़दूरी देना किसान के बस से बाहर है। हार्वेस्टर चलवाकर फसल कटवाने का एक विकल्प सामने है लेकिन बारिश की वजह से खेतों में नमी है। ऐसे में हार्वेस्टर से काम होना मुश्किल है। आसमान में बादलों का डेरा भी दिल की धड़कनें बढ़ा रहा है। अगर मज़दूरी के आसमान छूते रेट में फसल कटवाई तो लागत बढ़ जाएगी और मुनाफा घट जाएगा। असमंजस की स्थिति का सामना कर रहे किसानों से ग्राउंड रिपोर्ट ने बात की और जानी ज़मीनी हक़ीक़त।

बोवनी का समय हो चुका, लेकिन अभी तक नहीं कटी फसल

मध्यप्रदेश के आष्टा तहसील में स्थित रोलागांव के किसानों के सर पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं। 35 वर्षीय किसान टीनुपाल के पास 5 एकड़ जमीन हैं। हर वर्ष दशहरे तक फसल कट कर घर पहुंच जाया करती थी और नई फसल की बोवनी की तैयारियां शुरू हो जाती थी। इस वर्ष देर से आए जबरदस्त मानसून ने समय सारिणी को बदलकर रख दिया। न सोयाबीन की फसल काटी जा सकी है, बोवनी तो दूर की कौड़ी है।

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लागत और मुनाफ़े में ज़्यादा अंतर नहीं

टीनुपाल जैन ने ग्राउंड रिपोर्ट को बोवनी से लेकर कटाई तक का खर्चा गिनाया तो चौकाने वाले आंकड़े सामने आए। जहां हर वर्ष सोयाबीन की फसल से 5 एकड़ की ज़मीन पर उन्हें मुनाफ़ा 80 हज़ार से 1 लाख तक होता था। वहीं इस वर्ष केवल 27 हज़ार के आसपास रहेगा। वो भी तब जब 20 क्विंटल के करीब सोयाबीन की उपज हुई तो।

5 एकड़ की ज़मीन में अगर लागत का हिसाब लगाया जाए तो बोवनी, खाद-बीज, कीटनाशक, खरपतवार मज़दूरी, कटाई, थ्रेशर और ढुलाई का खर्चा 32 हज़ार के आसपास रहता है।

5 एकड़ खेत में 20 क्विंटल के करीब अगर उपज हुई और 3 हज़ार प्रति क्विंटल का भाव मिला तो लागत हटा कर मुनाफा 27000 रुपए के आसपास रहेगा। जो तीन महीने में तैयार हुई फसल के हिसाब से 9 हज़ार रुपये महीना बैठता है।

80 फीसदी फसल हुई बर्बाद

मौसम की मार से किसान परेशान है। किसानों ने फसल कटवाई ही थी कि बारिश हो गई कटी फसल भीग गई और थाली में बचा हुआ निवाला भी छिन गया। अब खेत फिर से पानी से भर चुके हैं। मज़दूर खेत में उतर कर फसल नहीं काट सकते हार्वेस्टर भी गीले खेत में नहीं चलेगा। सिवाय इंतेज़ार के विकल्प अब कोई दिखता नहीं। अनुमान के मुताबिक हाल ही में हुई बारिश ने 80 फीसदी फसल को बर्बाद कर दिया।

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कमलनाथ सरकार से उठा भरोसा

सरकार ने आनन फानन में सर्वे कर बीमे की राशि देने का एलान कर दिया। लेकिन किसानों को कमलनाथ सरकार पर अब भरोसा नहीं है। क्योंकि सरकार में आने के बाद 2 लाख का कर्ज़ माफ होने का वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। लोग फिर से शिवराज को याद कर रहे हैं।