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शुभ मंगल ‘ज़्यादा’ सावधान: हास्य रंग में बुना एक गंभीर विषय

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

आयुष्मान खुराना और जितेंद्र कुमार स्टारर फिल्म शुभ मंगल ज़्यादा सावधान के ट्रेलर ने तहलका मचा दिया है। हितेश कैवल्य के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म शुभ मंगल सावधान की दूसरी किश्त होगी। इस फ़िल्म को लेकर चर्चा इसलिए ज़्यादा है क्योंकि इस फ़िल्म में होमोफोबिया जैसे गंभीर विषय को हास्य विधा के ज़रिए समाज तक पहुंचाने का रिस्क लिया गया है। कहते हैं कभी-कभी हंसी मज़ाक़ में कही गई गंभीर बातें असर कर जाती है।

क्या है होमोफोबिया?

होमोफोबिया एक बीमारी है या एक सोच है जो समलैंगिकता को बीमारी समझती है और समलैंगिक लोगों के प्रति नफरत का भाव रखती है। हमारे समाज में आज भी एक लड़के का लड़के से प्यार करना या एक लड़की का लड़की के प्रति आकर्षण पागलपन समझा जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने भारत में समलैंगिगता को वैध ठहराते हुए इसे संवैधानिक मान्यता प्रदान की है। आर्टिकल 377 जो भारतीय दंड संहिता के तहत समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में रखता था उसे सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त कर दिया। लेकिन भारतीय समाज में इस विषय को लेकर अभी सहजता नहीं आई है। शायद इसमें अभी और समय लग जाएगा। हमारा समाज समलैंगिक होने को बीमारी मानता है लेकिन असल में समलैंगिकता को बीमारी मानना एक बीमारी है, जिसका इलाज यह फ़िल्म करती हुई दिखाई देती है।

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आयुष्मान खुराना ने विक्की डोनर के बाद कई ऐसी फिल्में की जो समाज में स्थित ऐसे विषयों पर चोट करती हैं जो हमारे जीवन का हिस्सा तो है लेकिन उसपर बात करने से लोग कतराते हैं। आयुष्मान एक फैमिली एंटरटेनर हैं। उनकी फिल्में परिवार साथ बैठकर देखता है। उनकी ऑडिएंस वह है जिसे आज के समय युवाओं की बदलती पसंद से रूबरू करवाना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।

आयुष्मान खुराना कहते हैं कि उन्हें गर्व महसूस होता है कि वे अपनी फिल्मों की ज़रिए समाज को संदेश देने में काम हो रहा है।