अलग-अलग घोषणापत्र वाला अजीबोगरीब गठबंधन

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

महाराष्ट्र में चुनाव है, भाजपा-शिवसेना साथ चुनाव लड़ रहे हैं, कहने को। उधर विपक्ष में “अभी तो जवान” शरद पवार की कांग्रेस और सोनिया गांधी की कांग्रेस गठबंधन में चुनाव लड़ रहे हैं। कौन किसके साथ कब तक है, वो तो वक्त बताएगा। लेकिन फिलहाल खबर ये है कि घोषणापत्र जारी होने लगे हैं। बाज़ी मारी है शिवसेना ने, घनघोर वादों के साथ जारी हुआ है शिवसेना का घोषणापत्र जिसमें 80 % भूमिपुत्रों को नौकरी में आरक्षण, किसानों का पूरा क़र्ज़ माफ़, गरीब किसानों को 10 हज़ार की आर्थिक मदद, 10 ₹ में भरपेट भोजन, 300 यूनिट तक बिजली खर्च पर 30% सब्सिडी, ग्रामीण इलाकों में छात्रों को बस सुविधा, 1 ₹ में इलाज वाला क्लीनिक, गैर रिहाइशी इलाकों में नाइट लाइफ ( यह क्या बला है), तीर्थदर्शन का प्रबंध आदि जैसे वादें शामिल है।

गठबंधन एक घोषणपत्र 2 क्यों ?

सवाल यहां यह है कि शिवसेना और भाजपा ने साझा घोषणापत्र जारी क्यों नहीं किया? क्या शिवसेना और भाजपा चुनाव बाद अलग हो जाएंगे? भाजपा ने शिवसेना के घोषणापत्र के सवाल पर कहा कि हमने अभी उनका घोषणपत्र नहीं पढ़ा, बाकी क्यो अलग घोषणापत्र जारी हुआ इसका जवाब रविशंकर प्रसाद ने नहीं दिया क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था पर उनको विशेष ज्ञान देना था। रविशंकर प्रसाद ने मंदी के सवाल पर इतने दिनों से बच रही उनकी पार्टी को बेहद ही शानदार तर्क दे दिया। उन्होंने कहा कि 2 फिल्मों ने 220 करोड़ का व्यापार किया इसलिए मंदी का सवाल करना बेकार है। मंदी पर वैसे भी अब कोई सवाल नहीं कर रहा। इतना बढ़िया जवाब तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी नहीं ढूंढ पाई थी। उम्मीद है प्रधानमंत्री मोदी को रविशंकर प्रसाद के रूप में नया वित्त मंत्री आज मिल गया होगा। बाकी मोहन भागवत तो कह ही चुके हैं कि मंदी सर्फ दिमाग में है। खैर लौटते हैं महाराष्ट्र की राजनीति पर..

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विलय करेंगे…

NCP-CONG ने अभी घोषणापत्र जारी नहीं किया है। करके होगा भी क्या? अभी दोनों पार्टी विलय पर विचार कर रही हैं, सूत्रों की मुताबिक। NCP की सुप्रिया सुले ने वैसे इनकार किया है। एक गठबंधन है जो एक हो जाना चाहता है और एक गठबंधन है वह एक दिखाई नहीं देता। खैर चुनाव नजदीक है। जनता को वोट डालना है, डाल आएगी। जीत लगभग तय मानी जा रही है.. प्रधानमंत्री मोदी की।

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