मध्य प्रदेश: सिंधिया राजघराने-अंग्रेज कनेक्शन पर क्यों ‘हिट विकेट’ हो गये शिवराज?

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अविनीश मिश्रा, न्यूज़ डेस्क

भोपाल।।मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का एक बयान राजनीति हलकों में तूल पकड़ता जा रहा है. शिवराज द्वारा तथाकथित तौर पर ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधने के चक्कर में खुद पार्टी से अलग थलग पड़ गये हैं. दरअसल शिवराज के उस बयान पर बवाल मचा हुआ है जिसमें उन्होंने सिंधिया राजघराने पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ राजघराने अंग्रेजों के साथ मिलकर भारत के साथ गद्दारी किया था. जिसके बाद चुनावी समर में कूदे ज्योतिरादित्य ने इसे हाथों-हाथ लेकर मामले को भूनाने में देर नहीं की. सिंधिया ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए शिवराज पर हमला बोलते हुए कहा कि शिवराज मेरे परिवार के बारे में जानने के लिए मेरी दोनों बुआ से पूछ ले (एक बुआ राजस्थान की मुख्यमंत्री और दूसरी उन्हीं के सरकार में मंत्री है)

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क्या है इतिहास?

कुछ इतिहासकार के मुताबिक ग्वालियर राजघराना और झांसी के बीच मतभेद गंगाधर राव के समय से ही था. गंगाधर राव के मृत्यु के बाद रानी लक्ष्मीबाई सत्ता पर आसीन हुई. अंग्रेजों ने उसके दत्तक पुत्र को उत्तराधिकारी मानने से इंकार कर दिया. जिसके बाद रानी ने ग्वालियर के महाराजा महादजी सिंधिया से सहायता मांगी लेकिन उन्होंने सहायता देने से इंकार कर दिया. जिसके बाद अंग्रेजों से हुए युद्ध में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हो गई. कुछ इतिहासकारों का मानना है की रानी के मृत्यु के बाद महादजी सिंधिया ने इस जीत की खुशी में जनरल रोज़ और सर रॉबर्ट हैमिल्टन के सम्मान में ग्वालियर में भोज दिया. शिवराज का निशाना शायद इसी ओर था.

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फिर अपने ही पार्टी में क्यों अलग थलग पड़ गये शिवराज?

आजादी के बाद ग्वालियर राजघराने का महाराजा जीवाजी राव सिंधिया थे लेकिन कुछ ही दिन बाद उनका मृत्यु हो गया. जिसके बाद बागडोर उनकी पत्नी विजयराजे सिंधिया पर आ गई. विजयराजे सिंधिया ने भाजपा को मध्यप्रदेश ही नहीं वरन पूरे देश में स्थापित करने का काम किया था. पार्टी को चंदा देने से लेकर स्थापना काल के समय तक स्टार प्रचारक की भूमिका में रही. जो शिवराज आज सिंधिया परिवार पर गद्दारी का आरोप लगा रहे हैं. वही शिवराज जब बुधनी से विधायकी का चुनाव लड़ते थे तो विजयराजे को अपने क्षेत्र में प्रचार करवाने के लिए पूरे दिन भर भाजपा कार्यालय में जमे रहते थे.