क्या शिवराज सिंह चौहान को केंद्र की राजनीति में लाने का समय आ गया है?

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न्यूज़ डेस्क।। मध्यप्रदेश का चुनाव भाजपा के हाथ से निकल गया, लेकिन भाजपा को सत्ता से बेदखल करने में कांग्रेस का जितना पसीना छूटा उसके पीछे एक ही शक्ति थी और वह थी शिवराज सिंह चौहान की। 15 साल तक मध्य प्रदेश पर राज करने वाले शिवराज को हमेशा एक शालीन, विकास पुरुष की तरह याद किया जाएगा। किसान को राजनीति का केंद्र बनाने में शिवराज ने अहम भूमिका अदा की। मध्य प्रदेश को कृषि कर्मण राज्य बनाने में भी शिवराज सिंह चौहान ने अहम भूमिका निभाई। लेकिन कृषि के आधारभूत ढांचे को सुधारने के बाद भी शिवराज किसान की आय में सुधार लाने में नाकाम रहे जिसका खामियाजा हार के रूप में भाजपा ने चुकाया। लेकिन एक बीमारू राज्य को विकास के ट्रैक पर लाने का काम शिवराज ने किया जिसे विपक्ष भी बखूबी जानता है। शिवराज सिंह चौहान का यह अनुभव अब देश के काम आ सकता है। अगर 2019 में भाजपा को फिर से सरकार बनाने को मिले तो शिवराज अच्छे कृषि मंत्री साबित हो सकते हैं। और मौका मिले तो अच्छे प्रधानमंत्री भी।

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लेकिन सत्ता की राह इतनी आसान नहीं होती। मध्य प्रदेश में हार का ठीकरा भी शिवराज पर ही फोड़ा जाएगा। शिवराज के आरक्षण वाले बयान को हार की वजह बताया जा रहा है। इस बार टिकट बंटवारे में संघ का दखल भी कुछ ज़्यादा रहा जिससे शिवराज नाराज़ थे। कई नेता मंत्रियों के नाते रिश्तेदारों को टिकट दिए गए जिससे भी शिवराज नाराज़ थे। लेकिन उनकी सुनी नहीं गई। लेकिन अब चुनाव हो चुके नतीजे सामने हैं और शिवराज हार की ज़िम्मेदारी ले चुके हैं।