“राम बिना रे कोई धाम नहीं” शबनम विरमानी की आवाज़ में

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

सकल हंस में राम बिराजे
राम बिना धाम नहीं 
सब ब्रह्माण्ड में जोत का बासा 
राम को सुमिरो दूजा नही
तीन गुण पर तेज हमारा
पांच तत्व पर जोत जले
जिनका उजाला चौदह लोक में 
सूरत डोर आकाश चढ़े
सकल हंस में राम बिराजे 

– कबीर

शबनम विरमानी एक ऐसा नाम जिसनें कबीर की विरासत को आगे बढ़ाने का काम अपने हाथ में लिया है। 15 शताब्दी के संत कबीर ने हिन्दू, मुसलमान, सिख, दलित सभी को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि ईश्वर न कैलाश में हैं, ना काबा में, वो तेरे पास है, वो घट-घट में विराजमान है। कबीर की संपत्ति उनके दोहे उनके विचार और उनकी वाणी है। जिसे कभी किसी किताब में नहीं उतारा गया। कबीर के विचारों को लोगों ने गाकर, किस्सागोई करके वर्षों तक जीवित रखा। शबनम विरमानी भी अपनी बुलंद आवाज़ से कबीर के विचारों को लोगों तक पहुंचा रही हैं। ‘द कबीर प्रोजेक्ट’ के माध्यम से शबनम विरमानी यह काम कर रही हैं। राजस्थान यात्रा और मालवा यात्रा के सफल प्रयोग के बाद शबनम विरमानी देश के हर कोने में कबीर को जीवंत कर रही हैं। शबनम विरमानी एक फ़िल्म निर्माता और बेहद ही उम्दा गायक हैं। उनकी फिल्मों को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

शबनम विरमानी हाथ मे पांच तारों वाला तंबूरा लेती हैं और कबीर के विचारों वाले लोक गीत को सुरों के मोतियों में पिरोती हैं। शब्दों का सटीक उच्चारण और एक अलहदा आवाज़ आपके दिलों को अंदर तक भेद देती हैं। वो अपने भजन की शुरुवात कबीर के दोहों से करती हैं और उसका अर्थ समझाते हुए कहती हैं कि कबीर ने 4 राम की व्याख्या की है। दुनिया केवल दशरथ के बेटे राम तक उलझ कर रह जाती है। जबकि राम तो घट घट में विराजमान है। राम परंपरा है राम जीने का तरीका है।

शबनम विरमानी को उनकी फिल्मों के लिए मुस्लिमों और हिंदुओं के विरोध का भी सामना करना पड़ा। उन्हें एन्टी हिन्दू और एन्टी नेशनल तक कहा गया। लेकिन वे कहती हैं कि यह अंधो को आइना दिखाने जैसा है। शबनम विरमानी के लोक गीत आपको प्रभावित करेंगे। यू ट्यूब पर मौजूद चैनल पर आप उनके सभी गीत सुन सकते हैं।

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