हरियाणा में लिंगानुपात सुधरा, लेकिन मानसिकता में बदलाव नहीं

ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

भारत में हरियाणा एक ऐसा राज्य हुआ करता था, जहां परुषों की तुलना में महिलाओं की संख्या बहुत खराब थी। बेटे की चाह में बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता था। पिछले एक दशक से सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं ने अपना असर दिखाया है, हरियाणा में लिंगानुपात काफी सुधरा है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओं जैसी योजनाओं से लोगों में जागरुकता बढ़ी है। कड़े गर्भपात और लिंग निर्धारण कानून से गर्भ में बेटियों की हत्या रुकी है। लेकिन अभी भी लोगों की मानसिकता में बदलाव नहीं हुआ है। आज भी हर परिवार के लिए एक बेटा होना ज़रुरी माना जाता है। 4-5 बेटियों के बाद भी बेटे की चाह खत्म नहीं होती। हरियाणा के हालात इतने खराब थे कि उन्हे अपने बेटों की शादी के लिए लड़कियां नहीं मिलती थी, ऐसे में उन्हे अन्य राज्यों का रुख करना पड़ता था।

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2011 की जनसंख्या के हिसाब से हरियाणा में प्रति 1000 लड़कों पर केवल 833 लड़कियां थी। लेकिन स्टेट लेवल सीआरएस डेटा के हिसाब से पिछले एक दशक में इसमें काफी सुधार हुआ। अगस्त 2019 तक हरियाणा का लिंगानुपात बढ़कर 920:1000 हो चुका है, जो एक बढ़ी छलांग है। वर्लड हेल्थ ऑरगेनाईज़ेशन के हिसाब से 952 स्त्री प्रती 1000 पुरुष सामान्य लिंगानुपात होता है।

सीआरएस डेटा (2016) के हिसाब से भारत का लिंगानुपात 909 से गिरकर 877 पर पहुंच गया है, जो चिंताजनक है।