पतंजलि की बिक्री में भारी गिरावट, जानिए कारण

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व्यापार डेस्क|| पतंजलि के प्रोडक्ट्स ने जिस तरह भारतीय बाज़ार में अफरा-तफरी मचाई थी, उससे हम सभी वाकिफ हैं। हिंदुस्तान यूनिलीवर, नेस्ले, डाबर जैसी विशाल कंपनियों को बाबा राम देव के स्वदेशी प्रोडक्ट्स ने धूल चटा दी थी।

100℅ की दर से बढ़ रही पतंजलि को अचानक से झटका लगा है। पिछले साल अक्टूबर-मार्च में पतंजलि ने 52% की वृद्धि दर्ज की थी जो इस साल घट कर मात्र 7 फीसदी रह गई है। इसका सबसे बड़ा कारण अन्य कंपनियों द्वारा आयुर्वेदिक प्रोडक्ट लांच करना बताया जा रहा है।

5 कारण जिसकी वजह से बाज़ार में पिछड़ रही है पतंजलि

पिछले महीने बाबा रामदेव ने अन्य कंपनियों द्वारा आयुर्वेदिक प्रोडक्ट लांच करने पर चुटकी लेते हुए कहा था कि बाकी लोग अब मोक्ष प्राप्ति की जुगत में लगे हैं। उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता। लेकिन इस तिमाही में जो पतंजलि का रिपोर्ट कार्ड पेश हुआ है, वह वाकई चिंता का विषय है।

1. बाजार में अब पतंजलि के प्रोडक्ट्स के कई विकल्प मौजूद हैं। हिमालया, यूनिलीवर का आयुष और डाबर जैसी कंपनियां पतंजलि की उत्पादों को चुनौती दे रहे हैं।

2. पतंजलि के प्रोडक्ट की सप्लाई चेन कमज़ोर है। दुकानों पर पतंजलि के प्रोडक्ट न होने पर ग्राहक अन्य कंपनियों के आयुर्वेदिक प्रोडक्ट खरीदते हैं फिर दोबारा पतंजलि की ओर नहीं मुड़ते।

3. पतंजलि को टक्कर देने के लिए यूनिलीवर ने अपनी आयुर्वेदिक प्रोडक्ट रेंज आयुष शुरू की है। जिसकी उपलब्धता छोटे से लेकर बड़े-बड़े स्टोर्स तक है।

4. 1997 में फार्मेसी से शुरू हुई पतंजलि अब अलग-अलग बाजार में अपने पैर पसार रही है। FMCG से लेकर डेरी प्रोडक्ट, कपड़ों से लेकर स्वदेशी मेसेजिंग ऐप तक। ऐसे में पतंजलि अपने मौजूदा प्रोडक्ट की सेल पर ध्यान नहीं दे पा रही।

5. पतंजलि प्रोडक्ट के प्रसार की एक मुख्य वजह अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट्स की तुलना में काम कीमत होना था। जो GST लागू होने के बाद लगभग बराबर हो गया है। ऐसे में पतंजलि को बड़ी हानि उठानी पड़ रही है।

GST लागू होने के बाद जहां पतंजलि की ग्रोथ सिंगल डिजिट में पहुंच गई तो बेहतर पहुंच और इंफ्रास्ट्रक्चर वाली प्रतिद्वंदी कंपनियां डबल डिजिट में बढ़ रही है। इस तिमाही में लगे झटके से उभरने का दावा कर रही पतंजलि जल्द ही मार्केट में वापसी के लिए आशावान है।

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