Home » साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने जिस शहर में बैठकर कहा था नालियां साफ करना हमारा काम नहीं, उस शहर को बाढ़ ने तबाह कर दिया

साध्वी प्रज्ञा ठाकुर ने जिस शहर में बैठकर कहा था नालियां साफ करना हमारा काम नहीं, उस शहर को बाढ़ ने तबाह कर दिया

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

ग्राउंड रिपोर्ट । सीहोर

मध्यप्रदेश की राजधानी से महज़ 35 कि.मी की दूरी पर बसा शहर सीहोर, 29 जुलाई की रात हुई 10 इंच बरसात में तबाह हो गया। छह घंटे के भीतर हुई मूसलाधार बारिश ने कभी सूखे और जल-अभाव में जीने वाले शहर को जलमग्न कर दिया। सीहोर शहर भोपाल लोकसभा के अंतर्गत आता है। साध्वी प्रज्ञा यहां से सांसद हैं। जब हाल ही में साध्वी पज्ञा सीहोर आईं थी, तब उनका एक बयान राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खी बन गया था। उन्होने कहा था कि “एक सांसद का काम नालियां साफ़ करना नहीं है, जो काम हमें करना है, हम बखूबी कर रहे हैं” किसे पता था यह चोक हो चुकी नालियां ही 29 जुलाई को सीहोर शहर के लिए तबाही लेकर आएंगी।

courtesy: Hindustan Times

प्रकृति के प्रकोप के आगे वैसे तो किसी का बस नहीं होता, लेकिन जब हमारे द्वारा की गई लापरवाही प्रकृति के रास्ते में आती है, तो उसका प्रकोप दोगुना होता है। जैसा की हम उत्तराखंड और केरल में देख चुके हैं।

READ:  अस्पताल में Oxygen Cylinder आते ही मरीजों के परिजनों ने लूट लिए, देखें वीडियो

29 जुलाई को आधी रात करीब 9 बजे सीहोर शहर में बरसात शुरु हुई, जो लगातार सुबह 3 बजे तक जारी रही। रात करीब 1:30 बजे बारिश थोड़ी धीमी हुई लेकिन तब तक शहर बाढ़ की चपेट में आ चुका था। कई जगह 10 फीट तक पानी भर गया था। शहर के मुख्य बाज़ार में 4 फीट तक पानी भर गया, जिसकी वजह से व्यापारियों का करोड़ों का नुकसान हो गया। इलेक्ट्रॉनिक्स के सामान, किराना, कपड़े से लेकर किताबें सब कुछ पानी में भीग चुका था। लोगों ने आधी रात जाग कर कुछ सामान बचाने की नाकाम कोशिश की लेकिन बाढ़ का पानी तब तक काफी तबाही मचा चुका था। शहर के निचले इलाके जैसे गंज, रानी मोहल्ला, मंडी में कई लोगों के घरों में पानी घुस गया। जान बचाने के लिए लोगों ने छत का सहारा लिया। जिन लोगों के छप्पर बाढ़ में बह गए उन्हे स्थानीय लोगों ने सहारा दिया। जब सुबह हुई तो तबाही का मंज़र देख लोगों की आंख नम थी। घर की गृहणियों ने कीचड़ से गृहस्थी के सामान को बटोरा और साफ करने में जुट गई। खाने पीने का सामान गंदे नाले के पानी से बर्बाद हो चुका था। कई घरों की दीवारें दरक चुकी थी। मदद को कुछ युवाओं के हाथ सामने आए। एक शहर जो कई दिनों से सूखे की मार झेल रहा था, बड़ी बेसबरी से अच्छी बारिश के इंतज़ार में था, पर उसे कहां बता था, उसके उम्मीदों की बारिश उसकी ज़िंदगी में ज़लज़ला लेकर आएगी। व्यापारियों ने बारिश में भीग चुके सामान को सड़क पर पटककर प्रदर्शन किया तो महिलाओं ने भी स्थानीय नेताओं की लापरवाही और अनदेखी को ज़िम्मेदार ठहराया।

READ:  Madhya Pradesh: Covid patient dies after being raped in hospital

सीहोर शहर प्रधानमंत्री के स्मार्ट शहर परियोजना का हिस्सा है। इसी के अंतर्गत यहां नए सिरे से सीवेज बनाने का काम शुरु हुआ, लेकिन ठेकेदार और स्थानीय नेताओं की लापरवाही से यह काम समय पर पूरा नहीं हो पाया। शहर की जल-निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। जिसकी वजह से इस बाढ़ ने शहर में दोगुनी तबाही की। सीवेज को लेकर शहरवासी कई बार स्थानीय नेताओं से शिकायत कर चुके थे। लेकिन प्रशासन सोता रहा। शहर में ब-मुश्किल सड़कों का निर्माण कार्य पूरा हो पाया। सड़कें अब लोगों के घरों की नीव से ऊपर हैं, जिसकी वजह से सड़क का सारा पानी लोगों के घरों में घुस जाता है।

READ:  Ram Navmi 2021: भगवान राम की आराधना का विशेष दिन है रामनवमी

स्थानीय सांसद प्रज्ञा ठाकुर के साथ-साथ यहां का स्थानीय प्रशासन भी इस समस्या का ज़िम्मेदार है और साथ ही राज्य की कमलनाथ सरकार भी और आंशिक तौर पर यहां के लोग भी जो अपनी समस्याओं को लेकर कभी अपनी आवाज़ बुलंद नहीं कर पाए।